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वेतन नहीं मिलने पर कोविड अस्पताल में कर्मचारियों का हंगामा

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नोएडा। सेक्टर-39 स्थित कोविड अस्पताल में मंगलवार को कर्मचारियों ने जमकर हंगामा किया। इनका आरोप है कि नवंबर के बाद से वेतन नहीं दिया गया है। इससे उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। कर्मचारियों को यह भी डर है कि बिना सैलरी दिए नौकरी से ना निकाल दिया जाए। मामले की सूचना पर सीएमएस ने कर्मियों को जल्द से जल्द वेतन दिलवाने का आश्वासन दिया है। साथ ही नौकरी से निकाले जाने की बात से इनकार किया है।
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अस्पताल में मंगलवार को लगभग 50 हाउसकीपिंग और सुरक्षा कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि 4 महीने से वेतन लंबित है। इन्हें नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी का भुगतान नहीं मिला है। दिल्ली स्थित परफेक्ट लव्या सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड ने इन श्रमिकों को काम पर रखा था। कंपनी के अनुसार, अस्पताल की ओर से बकाया राशी नहीं मिलने से वेतन अटका है। जल्द ही बजट मिलने के आसार हैं। इसके बाद कर्मियों की तनख्वाह जारी होगी।
बता दें कि अस्पताल में कार्यरत चौकीदार, सफाई कर्मचारी समेत कई संविदा कर्मियों का अनुबंध इसी माह खत्म हो रहा है। अनुबंध नवीनीकरण की प्रक्रिया फिलहाल शुरू नहीं हुई है। ऐसे में कर्मचारियों को नौकरी जाने का डर भी सता रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य सरकार से फंड जारी नहीं हुआ है। फंड जारी होते ही तो कर्मियों की तनख्वाह दी जाएगी। हंगामे की सूचना पर पहुंची सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल ने कर्मचारियों को शांत कराया। उन्होंने बताया कि जो स्टाफ कार्यरत है, उनकी जरूरत अस्पताल में व्यवस्था बनाए रखने के लिए है। हमने शासन एवं उच्च अधिकारियों को मामले से सूचित किया है। शीघ्र ही कर्मचारियों को वेतन दिलाया जाएगा।
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चाइल्ड पीजीआई ने 10 महीने में की रिकॉर्ड 468263 जांच
सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई ने 10 महीने में 468263 आरटीपीसीआर जांच कर रिकॉर्ड बनाया है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि प्रदेश में सबसे तेज जांच चाइल्ड पीजीआई में हो रही है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, जांच के दौरान करीब 1.2 प्रतिशत मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं।
जबकि, 98 प्रतिशत से ज्यादा लोगों की रिपोर्ट निगेटिव रही है। 14 मई को जांच शुरू की गई थी। तब 50 नमूनों की जांच हो रही थी। धीरे-धीरे आंकड़ा रोजाना 1800 सैंपलों की जांच पर पहुंच गया। वहीं, अब रोज करीब 2500 से लेकर 3000 जांच हो रही हैं। यहां 12 जिलों से सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं। संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. डीके सिंह ने बताया कि यह उपलब्धि पाने में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. सुमी नंदवानी ने महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
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