खरीदारों को देना होगा अपंजीकृत बिल्डरों का पूरा ब्योरा
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने ई-कोर्ट की तैयारी तेज कर दी है। सोमवार को खरीदारों और बिल्डरों को ई-कोर्ट के बारे में विभिन्न जानकारियां दी गईं। वहीं पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने, जवाब देने, कागजात जमा करने आदि के बारे में भी बताया गया। खरीदारों और बिल्डरों ने भी सवाल पूछकर अपनी उलझनों को दूर किया।
यूपी रेरा की सभी कोर्ट जनवरी माह से ई-कोर्ट में तब्दील हो जाएंगी। ई-कोर्ट का पोर्टल तैयार हो गया है। उसका प्रशिक्षण कर्मचारियों के साथ-साथ खरीदारों और बिल्डरों को भी दिया जा रहा है। लखनऊ में प्रशिक्षण देने का काम पूरा हो चुका है। जबकि ग्रेटर नोएडा स्थित कार्यालय में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार से शुरू हुआ। पहले दिन एक-एक घंटे की दो शिफ्ट में एलईडी स्क्रीन की मदद से 200 से अधिक खरीदारों और बिल्डरों को पोर्टल पर काम करने का प्रशिक्षण दिया गया। खरीदारों को शिकायत दर्ज करने, कागजात जमा करने, सुनवाई की हर जानकारी मिलने जैसी जानकारी दी गई। बताया गया कि यदि बिल्डर रेरा में पंजीकृत नहीं है तो खरीदार को बिल्डर के बारे में पूरी जानकारी पोर्टल पर देनी होगी। तभी शिकायत दर्ज की जाएगी। वहीं बिल्डरों को भी शिकायत पर जवाब देने, प्रोजेक्ट से जुड़े कागजात जमा करने आदि के बारे में बताया गया। मंगलवार को भी दोपहर दो बजे से चार बजे तक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यूनिटेक बिल्डर को देरी से कब्जा देने का जुर्माना भरना होगा
ग्रेटर नोएडा। यूपी रेरा की पीठ एक और दो ने सोमवार को विभिन्न बिल्डरों के 100 से अधिक मामलों पर सुनवाई की। दोनों पीठ ने 45 मामलों पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं न्याय निर्धारण अधिकारी ने देरी से कब्जा देने के मामले में यूनिटेक बिल्डर को जुर्माना भरने का आदेश दिया है। वहीं सात मामलों में फैसला सुरक्षित रखा है।
यूनिटेक बिल्डर का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। रेरा के अफसरों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर के मामलों में आदेश देने पर रोक नहीं लगाई है। केवल रिकवरी करने पर रोक है। ऐसे में न्याय निर्धारण अधिकारी ने एक मामले में देरी से कब्जा देने पर बिल्डर को जुर्माना देने का आदेश दिया है। बिल्डर बायर्स एग्रीमेंट में कब्जा देने की तिथि और कब्जा देने की मूल तिथि के बीच के समय का जुर्माना देना होगा। वहीं मंजू जे होम्स, गौड़ संस, एडिको इंफ्रास्ट्रक्चर, कृष्ण एसेस्ट्स, यूनिटेक आदि के सात मामलों में फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं पीठ एक ने 25 और पीठ दो ने 20 मामलों में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा है।