बुलंदशहर। वर्ष 2005 में अकबर-कमालपुर के जंगल में 119 गोवंशों की हत्या के बाद पुलिस की सख्ती से क्षेत्र में गोकशी व तस्करी पर कुछ हद तक अंकुश लग गया है। हालांकि, वर्ष 2003 से 2005 तक जनपद गोकशी व गो-तस्करी का कुख्यात केंद्र था और भूड़ चौराहा इनके परिवहन का प्रमुख स्थल। भूड़ चौराहे से ही दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, बदायूं, पीलीभीत होते हुए नेपाल सीमा तक मवेशी और मांस पहुंचाया जाता था।
बुलंदशहर की सीमाएं कई राज्यों से सटी हैं। इस कारण यहां से पशुओं की अवैध खेप अन्य राज्यों तक पहुंचाना तस्करों के लिए आसान था। भूड़ चौराहा इस कार्य के लिए उनको निर्बाध मार्ग उपलब्ध कराता था। इससे बुलंदशहर जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में गोकशी की गतिविधियां उस दौरान चरम पर थीं।
वहीं, 20 साल पुराने इस मामले में 25 आरोपियों को कठोर सजा दिलाने वाले एडीजीसी को उनके प्रयासों के लिए राष्ट्र चेतना मिशन के कार्यकर्ताओं ने सम्मानित किया है।
स्याना में गोकशी के बाद हुआ था बवाल, गई थी इंस्पेक्टर की जान
वर्ष 2018 में गोकशी के आरोप को लेकर स्याना क्षेत्र में बवाल हुआ और इस दौरान कुछ लोगों ने स्याना इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या कर दी थी। इस प्रकरण में इसी वर्ष एक अगस्त को न्यायालय ने 38 लोगों को दोषी करार दिया था। इनमें से पांच को इंस्पेक्टर की हत्या के लिए आजीवन कारावास और अन्य 33 को बलवा समेत अन्य मामलों में सात-सात वर्ष का कारावास सुनाया था। हालांकि, स्याना हिंसा के बाद जनपद में गोकशी की वारदातों में काफी हद तक लगाम लग चुकी है।