यहां 100 साल से ज्यादा पुरानी है होली पर नगाड़े बजाने की परंपरा
हरिप्रकाश बाबा
बिलासपुर। होली नजदीक है और बिलासपुर अपनी ऐतिहासिक होली मनाने के लिए फिर से तैयार है। यहां हर साल होली पर ढोल-नगाड़े बजाए जाते हैं और लोग टोली बनाकर होली खेलने के लिए घर से निकलते हैं। यह परंपरा दशकों पुरानी है और इस साल भी इसे निभाने के लिए क्षेत्र में ढोल-नगाड़े बजना शुरू हो गया है।
बिलासपुर के लोगों ने बताया कि होली के लिए इलाके के लोगों में विशेष उत्साह रहता है। साल भर लोग इस त्योहार का इंतजार करते हैं। एक सप्ताह पहले ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। ड्रम, नगाड़े और मृदंग बजाए जाते हैं। क्षेत्रीय लोकगीतों पर लोग जमकर थिरकते हैं। बिलासपुर के साथ खेरली हाफिजपुर, देवटा, जमालपुर समेत आसपास के पूरे क्षेत्र में सुबह-शाम ढोल बजाकर लोगों को होली के आगमन का अहसास कराया जाता है।
शतक पुरानी परंपरा को निभाने बनी टीम
गांव के महेश भाटी ने बताया कि होली पर ढ़ोल-नगाड़े बजाकर उत्सव मनाने की परंपरा कीरब एक शतक पुरानी है। उनके बड़े-बजुर्ग ऐसा किया करते थे। अब युवा इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके लिए कस्बे के युवाओं ने टीम बनाई है। इस टीम को होली है का अहसास कराने वाली टीम कहा जाता है। इसमें सूबे सिंह, महेश भाटी, प्रताप लंबरदार, तिलक, सुंदर, तेजपाल, वीरेंद्र, रवि समेत अन्य लोग हैं।
युवाओं के बीच होती है प्रतियोगिता
कमेटी के सूबे सिंह ने बताया कि युवाओं का उत्साह बढ़ाने के लिए ढोल बजाने की प्रतियोगिता कराई जाती है। इसमें विजेता को सम्मानित किया जाता है। प्रतियोगिता के चलते लोगों का उत्साह और बढ़ जाता है।