लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदली हुई तस्वीर पेश करेगा। यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को डिजिटल क्लासरूम, आधुनिक पुस्तकालय, नए शैक्षणिक भवन और छात्रावास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट प्लान तैयार किया गया है, जिसके तहत 2047 तक पांच चरणों में विश्वविद्यालय का विकास होगा।
बीबीएयू में शुक्रवार को विकसित भारत-2047 की तर्ज पर विश्वविद्यालय के विकास को लेकर बैठक हई। इसमें तय रोडमैप के अनुसार पहले चरण में भौतिक बदलाव किए जाएंगे। दूसरे चरण (2030-35) में नए शैक्षणिक ब्लॉक, पुस्तकालय अपग्रेड, छात्रावास विस्तार और खेल-फिटनेस ढांचे को मजबूत किया जाएगा। तीसरे चरण (2035-40) में शोध व नवाचार केंद्र, हरित परिसर, फैकल्टी-स्टाफ आवास, ई-कॉन्टेंट और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा। चौथे चरण (2040-45) में सामुदायिक शिक्षण व कौशल विकास केंद्र, स्वास्थ्य वेलनेस सेंटर और प्रशासनिक सेवाओं का डिजिटलीकरण किया जाएगा। वहीं पांचवें चरण (2045-47) में स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन, नॉलेज पार्क और तकनीकी-सक्षम सुरक्षा व्यवस्था लागू होगी।
बैठक में कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल, डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट प्लान समिति के चेयरपर्सन प्रो. कुशेंद्र मिश्रा और रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के चेयरपर्सन प्रो. शिशिर कुमार मौजूद रहे।
विद्यार्थियों के कौशल विकास पर जोर
बीबीएयू में छात्रों के कौशल विकास के लिए भी व्यापक योजना बनाई गई है। इसके तहत गुणवत्ता आधारित शिक्षा, वैश्विक साझेदारी और उद्योग-एकेडमिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय में तैयार इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट प्लान सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि छात्रों के हित में दूरदर्शी दृष्टिकोण है। विकसित भारत के लक्ष्यों को साकार करने में विश्वविद्यालय के प्रत्येक सदस्य की सक्रिय भूमिका होगी।
- प्रो. आरके मित्तल, कुलपति