समीक्षा बैठक में मौजूद महापौर और नगर आयुक्त।
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लखनऊ। महापौर ने कहा कि जीआईएस सर्वे के आधार पर गृहकर साल 2022 से ही लिया जाएगा। इससे पहले से वसूली की शिकायत मिली तो संबंधित कर्मचारी-अधिकारी पर कार्रवाई होगी। यह निर्देश उन्होंने शुक्रवार नगर निगम मुख्यालय में गृहकर वसूली समीक्षा बैठक में दिया।
महापौर ने कहा कि कई भवन स्वामी भुगतान कर देने के बाद भी बार-बार बिल पुनरीक्षण की शिकायतें कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। अब जीआईएस सर्वे समाप्त हो चुका है। ऐसे में गृहकर की पुष्टि और पुनरीक्षण के लिए राजस्व निरीक्षक स्वयं स्थल पर जाकर सत्यापन करें। यह देखने को मिला है कि लोगों ने साल 2024-25 तक का गृहकर जमा कर दिया है, उसके बाद उन्हें बढ़ा बिल दिया जा रहा है। यह गलत है। अब अगर ऐसा कोई भी प्रकरण सामने आएगा तो सीधे कार्रवाई की जाएगी। गृहकर वसूली को बढ़ाने के लिए भी उन्होंने सख्त निर्देश दिए और कम वसूली पर नाराजगी जताई।
बड़े बकायेदारों पर हो पहले कार्रवाई : महापाैर ने कहा कि वसूली की प्राथमिकता में बड़े प्रतिष्ठानों, होटल, दुकानें, व्यावसायिक भवन, स्टेडियम और सरकारी भवन होने चाहिए। छोटे आवासीय भवनों को प्राथमिकता का लक्ष्य न बनाएं। गृहकर नामांतरण के कामों में ढिलाई पर भी नाराजगी जताई और तेजी लाने को कहा। महापौर ने ये भी कहा कि एक राजस्व निरीक्षक एक ही वार्ड में तीन वर्ष से अधिक न तैनात हों।
दोबारा न हो अतिक्रमण : महापौर ने अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई पर असंतोष जताया। कहा कि नगर निगम की कार्रवाई प्रभावी नहीं दिख रही है, क्योंकि हटाए जाने के बाद भी अतिक्रमण दोबारा हो रहा है।