ग्रेटर नोएडा। अब सूरजपुर वेटलैंड के आसपास 50 मीटर तक किसी भी तरह का निर्माण नहीं होगा। वेटलैंड से जुड़ी एक शिकायत पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने आदेश दिया है। इस संबंध में जिला प्रशासन ने रिपोर्ट एनजीटी में दी थी। अब एनजीटी के आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी ग्रेनो प्राधिकरण की होगी। अवैध निर्माण को रोकने के साथ ही अतिक्रमण को हटाना होगा।
सूरजपुर वेटलैंड करीब 308 हेक्टेयर जमीन पर फैला हुआ है। वेटलैंड के आसपास अवैध निर्माण हो रहा है। एक बिल्डर प्रोजेक्ट और वेटलैंड के बीच सड़क को लेकर सागर दीक्षित ने एनजीटी में शिकायत दी थी। प्रभागीय वनाधिकारी गौतमबुद्ध नगर पीके श्रीवास्तव ने बताया कि एनजीटी ने जिला प्रशासन से भी रिपोर्ट मांगी थी। इस पर प्रशासन की तरफ से एनजीटी को एक प्रस्ताव भेजा गया था जिसमें एक सीमा तय करने का सुझाव दिया गया था। अब एनजीटी ने सूरजपुर वेटलैंड के आसपास 50 मीटर तक किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि एनजीटी का आदेश मिला गया है। इस संबंध में प्राधिकरण को भी अवगत करा दिया गया है। प्राधिकरण को वेटलैंड के आसपास हो रहे निर्माण को रोकना होगा।
अवैध निर्माण पर आंख बंद कर बैठा है प्राधिकरण
तुस्याना गांव के पास सूरजपुर वेटलैंड से सटी जमीन पर अवैध कॉलोनी बस चुकी है। प्राधिकरण ने भूमाफिया को नोटिस भी जारी किए थे, लेकिन वह कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित रहती है। प्राधिकरण अफसरों की मिलीभगत से वेटलैंड के पास अब बड़े-बड़े मकान बन चुके हैं।
अवैध निर्माण को हटाना होगी चुनौती
सूरजपुर वेटलैंड से लगी जमीन पर तुस्याना और देवाला गांव समेत अन्य जगह अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं। भूमाफिया लोगों को फंसाकर फरार हो चुके हैं। अब प्राधिकरण के सामने इन मकानों को हटाने की चुनौती होगी। लोगों के विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है। हालांकि, अभी 50 मीटर की परिधि में आने वाले निर्माण को चिह्नित किया जाएगा।
500 मीटर तक रोक लगाने की मांग
पर्यावरणविद् का कहना है कि वेटलैंड के आसपास 50 मीटर तक निर्माण पर रोक का फैसला सही है, लेकिन यह सीमा काफी कम है। 50 की जगह 500 मीटर तक पक्के निर्माण पर रोक होनी चाहिए। आवासीय निर्माण होने से वेटलैंड को नुकसान पहुंचेगा। भूजल दोहन के कारण वेटलैंड की वाटर बॉडी सूख सकती है। रिहायशी क्षेत्र के आसपास जंगली जानवर और पक्षी भी कम हो जाते है।
वेटलैंड की जमीन पर भी अवैध निर्माण
तुस्याना गांव के पास 1980 के सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे में जमीन वेटलैंड के नाम दर्ज है, लेकिन वन विभाग ने इसे वेटलैंड से बाहर कर दिया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका विचाराधीन है। पर्यावरणविद् उस हिस्से को भी वेटलैंड में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।