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अरावली पर अवैध कब्जा

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नूंह। जिले के अरावली वन क्षेत्र पर स्थानीय लोगों ने वर्षों से कब्जा किया हुआ है। यहां पर लंबे समय से लोग कानून की धज्जियां उड़ाते हुए घर बना कर रह रहे हैं। अगर सरकार व प्रशासन ने यहां पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में इनको यहां से हटाने के लिए गुरुग्राम व फरीदाबाद की तरह लोगों के विरोध का सामना करना पड़ेगा।
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नूंह खंड के गांव रोजका मेव से कोटला, नगीना, नूंह से तावडू, फिरोजपुर झिरका से तिजारा सहित कई रोड के साथ अरावली का क्षेत्र है। इसी के साथ यह सरकारी भूमि है। इस भूमि पर किसी भी व्यक्ति को स्थायी या फिर अस्थायी अतिक्रमण करने का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन यहां पर अरावली पूरी तरह से अतिक्रमण के चपेट में हैं।
वन्य जीव हो रहे कम
यह पूरी जमीन वन विभाग के अंतर्गत आती है, लेकिन वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी आंख बंद किए हुए हैं। वन विभाग ने अरावली देखभाल के लिए गार्ड तैनात किए हैं। लेकिन वे भी इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। अगर इसी तरह से यह अतिक्रमण बढ़ता रहा तो एक दिन यहां से स्थानीय लोगों को हटाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। दूसरी ओर अरावली की तलहटी में जिस तरह से कब्जा बढ़ता जा रहा है, उससे वन्यजीव भी धीरे-धीरे लोगों की चहल-पहल से लुप्त हो रहे हैं। अधिकतर यहां पर रहने वाले लोग वन्य जीवों का शिकार करते हैं। इसी कारण कुछ प्राणी तो उनके शिकार हो जाते हैं और कुछ भाग जाते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश नहीं मान रहे
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ पर पूर्ण रूप से रोक लगाई हुई है। इसके बावजूद यहां अवैध कब्जे हो रहे हैं और वन विभाग व जिला प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। नूंह खंड के गांव खोड़ बसई से रेहना, टपकन, माहोन, बीवा, पलड़ी, खोरी, बाई, मोहम्मदपुर, कोटला के अलावा नगीना खंड के कंसाली व फिरोजपुर झिरका के दर्जनों गांवों में अरावली में सैकड़ों लोगों ने अपना घर बनाया हुआ है। यह सीधे नजदीकी गांवों के संपर्क में रहते हैं। वहीं पास के लगते गांवों में ही उक्त लोग मजदूरी कर अपना गुजारा करते हैं। यहां पर स्थानीय लोगों के अलावा दूर दराज के क्षेत्रों के लोग है, जो काम की तलाश के साथ कई लड़ाई झगड़े के कारण भी यहां पर छिपे रहते हैं।
पैमाइश कर हटाए जाएंगे अवैध कब्जे
इस बारे में डीएफओ विजेंद्र सिंह ने बताया कि बीते वर्ष भी हमने पुन्हाना, पिनगवां में 90 एकड़ जमीन को कब्जा से मुक्त कराया। इसके अलावा वहां पर 24 मकान तोड़े गए। जहां पर पौधरोपण कराया गया है। जिले का यह अरावली क्षेत्र कुछ पंचायतों व कुछ वन विभाग के अंतर्गत आता है। मानसून के बाद वन विभाग के अंदर आने वाले अवैध कब्जा को पैमाइश कर हटवाने का कार्य किया जाएगा।
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सरकार को इस ओर जल्द से जल्द ध्यान देने की जरूरत है। आज अरावली पर्वत से हमें शुद्ध हवा के साथ अन्य कई लाभ मिल रहे हैं। -
नियामत अली, पार्षद।
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सरकार के साथ स्थानीय जिला प्रशासन को गंभीरता से कार्य करने की जरूरत है। अवैध कब्जा करने वालों को तुरंत यहां से हटाया जाना चाहिए।- मुनेश फौजी, उजीना।
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इसे हल्के में लेना सरकार व प्रशासन को काफी मंहगा पड़ सकता है। कई लोगों ने अरावली पर्वत में अपने बड़े मकान बनाए हुए हैं।- साबिर, सरपंच मालब।
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अवैध कब्जा को हटाने में जिले के पंचायत विभाग को ध्यान देने की जरूरत है। कई जगह पर पंचायतों की जमीन भी अरावली से लगी है।-आनंद निवासी गांव आटा।
फोटो ऱ् नूंह खंड के गांव पलड़ी के पास अरावली श्रृंखला में बनाया मकान।
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