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Noida News: पशु हमारी प्रकृति का अहम हिस्सा

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-सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पशु प्रेमियों के चेहरे पर लौटी रौनक
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- कई दिनों से ग्रेनो वेस्ट की सोसाइटियों में हो रहा था प्रदर्शन

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पशु प्रेमियों के चेहरे पर खुशी लौटा दी है। पशु प्रेमियों ने दोबारा आएं फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पशु हमारी प्रकृति का अहम हिस्सा हैं। इन्हें शेल्टर होम की कैद में रखना सही नहीं था। इसका ही विरोेध किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि नए आदेश के अनुसार अब कुत्ते लोगों के बीच ही रहेंगे। रेबीज पीड़ित या हिंसक कुत्तों को ही शेल्टर होम में रखा जाना सही कदम है।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले पशु प्रेमियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अच्छा है। उन्होंने बताया कि जिस तरह बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में हर सुविधा देने के बाद भी उन्हें खुश नहीं रखा जा सकता, ठीक उसी तरह शेल्टर होम में रखकर कुत्तों को खुश नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि कुत्तों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बहुत कम है। हमारे वातावरण में पले बढ़े होने के कारण वे यहां के वातावरण से ज्यादा बेहतर समायोजन करते हैं और उन्हें रखने में कम परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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आक्रामक कुत्तों की कैसे होगी पहचान
पशु प्रेमी आकाश का कहना है कि अब भी उनकी दो बड़ी चिंताएं हैं। पहली, आक्रामक कुत्तों की परिभाषा स्पष्ट नहीं की गई है। कौन सा कुत्ता आक्रामक है और कौन सा नहीं, इसका निर्णय कैसे होगा, यह सवाल सभी के मन में है। दूसरी, फीडिंग पॉइंट से जुड़ी समस्या है। एक जगह खाना खिलाने से कुत्तों में लड़ाई हो सकती है।
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कुत्तों को खिलाने की जगह लोगों के घरों से ज्यादा दूर नहीं होनी चाहिए। कुत्ता प्रेमियों से बातचीत कर कुत्तों को भोजन खिलाने के स्थान की जगह चुनी जानी चाहिए।
- राकेश,निवासी

सुप्रीम कोर्ट का फैसला अब स्वागत योग्य है। कुत्तों से किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। कुत्ते भी समाज का हिस्सा है।
- अंजली,निवासी

सोसाइटी में कुत्तों को लेकर जागरूकता फैलाई जा रही है। एक जगह ही कुत्तों को खाना खिलाया जाता है।
- हरि शंकर नायक,ऐस सिटी

लावारिस कुत्ते किसी न किसी को काट लेते हैं। इसका भी ध्यान दिया जाना चाहिए, जिससे निवासियों को परेशानी न हो।
- दिनकर कुमार,निवासी
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