-ग्रेटर नोएडा में हर साल बढ़ रहा, सर्दियों में सबसे अधिक किया गया रिकॉर्ड
-औद्योगिक सेक्टर में सर्वाधिक प्रदूषण, अस्पताल-कॉलेजों के पास भी काफी शोर
नवीन कुमार
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के अलग-अलग इलाकों में हर साल ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। हालांकि गर्मी के मौसम में ध्वनि प्रदूषण कम रहता है, लेकिन सर्दियों में वायु के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी शहर के लोगों को परेशान करता है। सबसे अधिक औद्योगिक सेक्टर में ध्वनि प्रदूषण है, लेकिन अस्पताल और कॉलेजों के आसपास भी काफी शोरगुल रहता है। उसके बावजूद जिम्मेदारों की तरफ से ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा हैं।
दिल्ली एनसीआर वायु प्रदूषण के लिए जाना जाता है। हर वर्ष सर्दी के मौसम में यहां के प्रमुख शहर विश्व के टॉप-10 प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल होते है। वायु प्रदूषण डार्क रेड जोन में 400 के पार पहुंंच जाता है। ग्रेटर नोएडा की स्थिति भी ऐसी ही होती है। यहां पर ध्वनि प्रदूषण भी लगातार बढ़ रहा है। फरवरी 2023 से ध्वनि प्रदूषण की निगरानी की जा रही है। चार अलग-अलग सेक्टरों में ध्वनि प्रदूषण को परखा जा रहा है। सभी जगह हर साल प्रदूषण बढ़ रहा है। गर्मी के मुकाबले सर्दी में ध्वनि प्रदूषण अधिक रहता है। रिहायशी क्षेत्र में ऐस सिटी सोसाइटी के आसपास ध्वनि प्रदूषण की निगरानी हो रही है। यहां फरवरी 2023 को दिन में 59 और रात में 53 डेसिबल ध्वनि प्रदूषण रहा था। जबकि अब 60 और 56 पहुंच गया है। अस्पताल और कॉलेज के आसपास के क्षेत्र को शांति वाला माना जाता है, लेकिन यहां भी ध्वनि प्रदूषण मानकों से काफी ऊपर है। औद्योगिक सेक्टर साइट-सी में ध्वनि प्रदूषण दो साल में 62-58 से 72-61 पहुंंच गया है।
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बढ़ रहा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा
हाल ही में की गई एक शोध में दावा किया गया था कि ध्वनि प्रदूषण जानलेवा साबित हो रहा है। वायु प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदषिण ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन रहा है। यातायात के शोर में अगर 11 डेसिबल की बढ़ोतरी होती है तो यह खतरा छह फीसदी तक बढ़ जाता है। 80 डेसिबल तक शोर वाले इलाकों में यह खतरा 11 फीसदी तक पहुंच जाता है।
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2023 नवंबर में रहा सबसे अधिक शोर-शराबा
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वर्ष 2023 से ध्वनि प्रदूषण की निगरानी कर रहा है। रिहायशी से लेकर मार्केट, उद्योग और संस्थागत सेक्टर में निगरानी उपकरण लगे है। इस दौरान नवंबर, 2023 माह में सबसे अधिक शोर शराबा रहा है। तब मानकों से काफी अधिक ध्वनि प्रदूषण रहा था। संस्थागत सेक्टर में जहां दिन में 50 और रात में 40 डेसिबल ध्वनि प्रदूषण होना चाहिए। वहां उस माह 71 से 61 डेसिबल रहा था। औद्योगिक सेक्टर में तब दिन में 66 और रात में 86 डेसिबल तक पहुंंच गया था। जबकि 75-70 लिमिट है।
ग्रेटर नोएडा में ध्वनि प्रदूषण पर एक नजर
माह-वर्ष एस सिटी जगत फार्म नॉलेज पार्क-1 यूपीसीडा साइट-सी
फरवरी-2023 59/53 60/55 60/52 62/58
फरवरी-2024 51/44 64/54 49/38 63/58
फरवरी-2025 60/56 73/68 63/55 72/61
अप्रैल-2023 53/44 61/51 48/34 58/53
अप्रैल-2024 50/46 66/57 49/40 62/58
अप्रैल-2025 58/55 68/64 56/53 70/66
जुलाई-2023 54/46 64/58 43/35 58/51
जुलाई-2024 52/45 62/58 49/38 63/59
नवंबर-2023 64/54 67/59 71/61 66/86
नवंबर-2024 63/54 65/63 53/43 75/70
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दिसबर-2023 54/47 64/57 48/40 61/52
दिसंबर-2024 59/52 64/61 56/46 72/63
नोट: मानक 55/45 65/55 50/40 75/70
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वायु प्रदूषण के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण की भी लगातार निगरानी की जा रही है। ध्वनि प्रदूषण के कारणों के संबंध में संबंधित विभाग को जानकारी दी जाती है। उस पर काम भी किया जा रहा है। यहां पर यातायात और निर्माण कार्य सबसे बड़े कारण है।
विकास मिश्रा, क्षेत्रीय अधिकारी ग्रेटर नोएडा यूपीपीसीबी