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एलिवेटेड रोड परियोजना : 445 पेड़ों की जान बचाएगा उद्यान विभाग

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एलिवेटेड रोड परियोजना : 445 पेड़ों की जान बचाएगा उद्यान विभाग
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नोएडा। चिल्ला रेगुलेटर से महामाया फ्लाईओवर तक 5.50 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड परियोजना का रास्ता साफ करने की कवायद तेज हो गई है। इस परियोजना के रास्ते में आ रही हरियाली के लिए सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सर्वे के आधार 445 पेड़ों की पहचान की गई है, जिनका ट्रांसप्लांट करने की योजना प्राधिकरण बना रहा है। इसके लिए प्राधिकरण ने दिल्ली सिंचाई विभाग में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के लिए आवेदन कर दिया है।
प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक, शाहदरा ड्रेन के किनारे एलिवेटेड रोड का निर्माण किया जाना है। ड्रेन दिल्ली सिंचाई विभाग के अधीन आती है। ऐसे में पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने के लिए सिंचाई विभाग को पत्र लिख दिया गया है। एनओसी मिलने के बाद उद्यान विभाग की तरफ से जिला वन अधिकारी से मंजूरी ली जाएगी। जिसके बाद काम शुरू कर दिया जाएगा। परियोजना की राह में आ रहे अधिकांश पेड़ नए हैं। ऐसे में इन्हें काटने की बजाय ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को अंजाम देकर इन्हें बचाया जाएगा। उद्यान विभाग इस काम को खुद करेगा।
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ऐसे होता है ट्रांसप्लांट
पेड़ों के ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया कठिन और खर्चीली होती है, लेकिन इसके जरिये पेड़ों को नया जीवन दिया जा सकता है। इस प्रक्रिया के तहत पेड़ के चारों ओर तय गहराई और चौड़ाई में गड्ढा खोदा जाता है। तने और जड़ के अधिकतम हिस्से के साथ पेड़ को क्रेन की मदद से उठाकर खोदे गए गड्ढे में रखकर मिट्टी से भरा जाता है। ध्यान यह रखना होता है कि उखाड़ते समय जड़ों को कम से कम नुकसान हो। ट्रांसप्लांट के बाद जड़ों में नमी बनाए रखना भी बहुत आवश्यक है।
45 करोड़ घटी परियोजना की लागत
25 जनवरी को प्रोजेक्ट का शिलान्यास कर दिया गया था। मौके पर परियोजना से संबंधित एक बड़ा सा बोर्ड लगाया गया था, हालांकि इसे अब हटा दिया गया है। इसमें परियोजना की लागत 650 करोड़ रुपये लिखी गई थी। प्राधिकरण ने एस्टिमेट तैयार कर स्वीकृति के लिए आईआईटी मुंबई भेजा था। आईआईटी से करीब 605 करोड़ रुपये का एस्टिमेट स्वीकृत हो गया है।
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50 फीसदी खर्च सरकार देगी
अधिकारियों के मुताबिक परियोजना पर खर्च होने वाली राशि का 50 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार देगी। हालांकि, फिलहाल एस्टिमेट का टेक्निकल ऑडिट चल रहा है। इसके बाद इसे प्रशासनिक मंजूरी के लिए सीईओ को भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि दस दिन में प्रशासनिक स्वीकृति मिल जाएगी। एलिवेटेड रोड का निर्माण उत्तर प्रदेश सेतु निगम को करना है। सरकार के हिस्से की राशि के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा, लेकिन इस बीच परियोजना का काम शुरू कराया जा सकता है।
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