-ईरान के चाबाहार बंदरगाह में सुरक्षा कारणों से अन्य स्थान पर ले जाया गया जहाज, कर्मियों के मोबाइल ले लिए गए थे
माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी/रबूपुरा। ईरान की सेना और नागरिकों के बीच चल रहे उग्र आंदोलन के बीच लगभग 11 दिनों से फसा भारतीय जहाज कैटस सोमवार दोपहर सुरक्षित दुबई पहुंच गया। जहाज में अपने जहाज के साथियों के साथ सवार रबूपुरा के नगला हुकुम सिंह निवासी और मर्चेंट नेवी कर्मी आकाश चौधरी ने दुबई पहुंचकर अपने परिजन से संपर्क किया और उन्हें अपने सुरक्षित होने की जानकारी दी।
गौतमबुद्ध नगर के रबूपुरा स्थित नगला हुकुम सिंह निवासी इकपाल सिंह के नाती और मर्चेंट नेवी कर्मी आकाश चौधरी (23) पुत्र प्रमोद चौधरी ने परिजन को बताया कि ईरान में चल रहे उपद्रव के मद्देनजर चाबाहार बंदरगाह से उनके जहाज को ईरान में ही किसी दूसरे स्थान पर ले जाया गया था। यहां पर ईरानी सेना के जवान जहाज की सुरक्षा कर रहे थे। सुरक्षा के मद्देनजर उनके मोबाइल ले लिए थे। ईरानी सेना के सुरक्षा घेरे में उनका जहाज नौ जनवरी से लेकर 18 जनवरी तक रहा। रविवार रात उनके जहाज को दुबई स्थित बंदरगाह के लिए रवाना किया गया। सोमवार दोपहर तीन बजे वह दुबई के बंदरगाह पहुंचे। दुबई पहुंचने के बाद उनकी जान में जान आई। इसके बाद उनको मोबाइल वापस किए गए। मोबाइल मिलने पर उन्होंने अपने परिजन को सुरक्षित होने की जानकारी दी। उनके सुरक्षित दुबई पहुंचने की खबर सुनकर उनकी मां रितू, पिता प्रमोद, नाना इकपाल सिंह चौधरी की सांस में सांस आईं। इकपाल सिंह ने बताया कि कई दिनों से उनका परिवार आकाश की चिंता में था। आकाश मूल रूप से अलीगढ़ के निवासी हैं और लंबे समय से रबूपुरा के नगला हुकम सिंह और जेवर में रहते हैं।
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10 दिनों तक अटकी रही सांस
मर्चेंट नेवी में प्रशिक्षु कर्मी आकाश चौधरी ने परिजन को बताया कि नौ जनवरी को जब उनका जहाज कैटस ईरान के चाबाहार बंदरगाह पर पहुंचा तो उन्हें वहां पर ईरानी सेना और जनता के बीच हो रहे संघर्ष की खबर मिली। इस दौरान आशंका थी कि उनके जहाज पर भी हमला हो सकता था। ऐसे में उनके जहाज पर मौजूद कर्मियों की परेशानी बढ़ गई। इस दौरान ईरानी सेना के जवान उनके पास पहुंचे और चाबाहार बंदरगाह से जहाज को किसी अन्य स्थान ले चलने के लिए कहा गया। इस दौरान उनके मोबाइल भी ले लिए गए थे। लगभग 10 दिनों तक वह किसी अन्य जगह पर जहाज के अंदर ही ईरानी सेना की सुरक्षा में रहे। इस दौरान उनके पास किसी को संपर्क करने का साधन भी नहीं था। उन्हें डर था कि कहीं अमेरिकी सेना का ईरान पर हमला न हो जाए। ऐसी स्थिति में वह फस सकते थे। हालांकि, भारतीय प्रशासन से बेहतर संबंध होने के चलते ईरानी सेना ने उनकी सुरक्षा की और वह सकुशल दुबई वापस लौट पाए।
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नौ जनवरी को चाबाहार बंदरगाह पहुंचा था कैटस
जयपुर स्थित कंपनी रूद्राक्ष का जहाज कैटस भारत से सामान लेकर निकला था। कैटस में कंपनी और मर्चेंट नेवी के 44 कर्मी सवार हैं। पहले जहाज दुबई में रुका था। 8 जनवरी को जहाज ईरान के चाबाहार बंदरगाह जाने के लिए दुबई से निकला था।
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संदीप वर्मा