फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Noida News: खेल-खेल में बच्चों की मानसिक सेहत सुधारेगा एम्स

विज्ञापन
विज्ञापन
मेघालय में चले प्रोजेक्ट में मिले बेहतर नतीजे, अब सीबीएसई के स्कूलों में शुरू करने का प्रस्ताव
विज्ञापन

छठी से 8वीं तक के बच्चे होंगे शामिल, इस उम्र में शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य में आता है बदलाव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एम्स अब छठी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों का दोस्त बनकर उनकी मानसिक सेहत सुधारेगा। खेल-खेल में उन्हें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूक करेगा। साथ ही, उनके गुस्से व लंबे समय तक फोन देखने के दुष्प्रभाव सहित दूसरी समस्याओं को दूर करेगा। मौजूदा समय में बच्चे 9 सेकंड भी फोकस नहीं कर पा रहे हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि छठी से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे किशोरावस्था में प्रवेश करते हैं। इस दौरान उनमें कई तरह के बदलाव आते हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। लंबे समय तक फोन पर रहने के कारण बच्चों की एकाग्रता घटती है। उनके व्यवहार में बदलाव आता है। ऐसे बच्चों के लिए मेघालय के कुछ स्कूलों में प्रोजेक्ट चलाया गया। इसके परिणाम काफी बेहतर मिले। अब इसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों में चलाने का प्रस्ताव दिया गया है। इस प्रोजेक्ट को मेंटल हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया चलाएगा। इसका प्रोजेक्ट का नाम मेट रखा गया है।
विज्ञापन

एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. नंद कुमार ने बताया कि खेल-खेल में बच्चों को मानसिक स्वस्थ को बेहतर बनाने के लिए प्रोजेक्ट बनाया गया है। मौजूदा समय में बच्चों की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता लगातार घट रही है। बच्चे अब नौ सेकंड तक भी एकाग्र नहीं हो पाते। जबकि पहले बच्चे आधे घंटे तक एकाग्र होकर पढ़ते थे। इस बदलते व्यवहार के कारण उनकी पढ़ाई सहित दूसरे कार्य प्रभावित होते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया जाए। बच्चों की इन्हीं स्थिति को सुधारने के लिए मेट (दोस्त) कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें जैविक और मानसिक विकास को एक साथ जोड़ा जाएगा। इसमें बच्चे खुद को बेहतर समझ सकेंगे और मानसिक दबाव से बाहर आएंगे। यह कार्यक्रम बच्चों की मानसिक सेहत सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा। प्रोजेक्ट के तहत सभी छात्रों के लिए चार अलग-अलग वर्कशॉप होंगी जो दो-दो घंटे की होंगी। इसमें बच्चों का पूरी तरह से मानसिक विकास किया जाएगा।

ये होंगी वर्कशॉप
ब्रेन और ब्रीदिंग : इसकी शुरुआत प्राणायाम से होगी। बच्चों को खेल-खेल में सांस पर ध्यान केंद्रित करने के बारे में बताया जाएगा। साथ ही, बच्चों को यह भी बताया जाएगा कि किशोरावस्था में उनके दिमाग में क्या बदलाव होते हैं और कैसे इससे सोच व भावनाएं प्रभावित होती हैं।


रिश्ते और मैं : समाज में रिश्तों का महत्व और उपयोगिता के बारे में बच्चे को समझाया जाएगा। बताया जाएगा कि आप से और दूसरों से रिश्ता कैसा होना चाहिए। इसमें दोस्त, माता-पिता और घरवालों के साथ उनके संबंध कैसे मजबूत होंगे यह सिखाया जाएगा।


हैप्पी गट, हैप्पी ब्रेन : बच्चों को पाचन तंत्र और मस्तिष्क के संबंध को समझाया जाएगा। विशेषज्ञों ने बताया कि हमारी आंत दूसरा मस्तिष्क है। 90 फीसदी हैप्पी हार्मोन आंत में बनते हैं। केवल 10 फीसदी मस्तिष्क में ही विकास होता है। ऐसे में अच्छा खानपान मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। बच्चों को यह समझाया जाएगा कि अच्छा खानपान कैसे मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
विज्ञापन



परिजन बनेंगे हिस्सा : बच्चों को अभिभावक और परिजन के साथ जोड़ने व उनसे घुलने-मिलने की कोशिश की जाएगी। इसमें बच्चे डिजिटल गैजेट या मोबाइल पर क्या देख रहें हैं। इस बारे में परिवार को जागरूक किया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें