नोएडा। ट्विन टावर को ढहाने के बाद आसपास की इमारतों को नुकसान पहुंचने की संभावना है। ऐसे में ध्वस्तीकरण के बाद इनमें लोगों का रहना सुरक्षित होगा या नहीं यह बड़ा सवाल है। इस पर जिलाधिकारी ने प्राधिकरण को पत्र लिखकर ध्वस्तीकरण के बाद सभी इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट कराने के लिए कहा है, ताकि इमारतों के सुरक्षित होने का पता चल सके। प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी ने इस पर हामी भरी है। एमरॉल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज के अति संवेदनशील क्षेत्र की इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट होगा। सीईओ का कहना है कि टावर ढहाने के बाद यह पता लगेगा कि कहीं कोई नुकसान तो नहीं पहुंचा। इसके लिए पहले से ही वीडियोग्राफी कराई गई है। आरडब्ल्यूए की ओर से इस बाबत चिंता जाहिर की जा चुकी है।
27 अगस्त तक लगेंगे क्रैक गॉज
ट्विन टावर की आसपास की इमारतों में क्रैक गॉज लगाए जा रहे हैं। इससे पता चलेगा कि कहां-कहां दरारें आई हैं। यह पहले से थीं या ब्लास्ट के बाद आईं हैं। इसका पहले और बाद के विश्लेषण का डाटा सुरक्षित रखा जाएगा, जो क्लेम में काम आएगा।
धूल का अनुमान लगाना संभव नहीं
ब्लास्ट के बाद धूल को लेकर वैज्ञानिक अनुमान लगाना संभव नहीं है। इसका अनुमान यूपीपीसीबी और डिमोलिशन एजेंसी भी नहीं लगा पा रही है। केवल यह बताया गया कि जो भी धूल निकलेगी वह कम समय के लिए होगी। पानी के छिड़काव के लिए मशीनें लगाई जा रही हैं। मेकेनिकल स्वीपिंग मशीन लगेगी।
सीबीआरआई ने संभाला मोर्चा
सीबीआरआई की टीम ने अध्ययन के लिए मोर्चा संभाल लिया है। अब टीम ब्लास्ट के बाद ही जाएगी। टीम की ओर से यहां सेंसर, थर्मल कैमरे आदि लगाए जा रहे हैं। आईआईटी चेन्नई की टीम के आने की भी सूचना है।
आसपास के टावरों की मजबूती पर लगनी है मुहर
बृहस्पतिवार को बैठक में आसपास की इमारतों की मजबूती को लेकर मंथन किया गया। आरडब्ल्यूए ने स्मॉग गन और 50-50 मजदूर मांगे हैं। जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से पानी के छिड़काव के अलावा मशीनों से सफाई कराई जाएगी। मीडिया के लिए सेक्टर-128 फ्लाईओवर पर व्यू प्वाइंट होगा।