भूना। फसल खराबे पर मिलने वाले मुआवजे के लिए गलत जानकारी देना किसानों पर भारी पड़ रहा है। भूना क्षेत्र सहित आसपास के गांवों के करीब 500 से अधिक किसानों ने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर जलभराव या अन्य प्राकृतिक आपदा से फसल को 50 से 75 फीसदी तक खराब बताकर मुआवजे का दावा कर दिया। राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर जाकर जांच की तो सच्चाई कुछ और ही निकली। नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार ने इसकी पुष्टि की है।
जांच में पाया गया कि जिन किसानों ने फसल को खराब बताया था उनकी धान की फसल वास्तव में अच्छी हुई है। अब ये किसान मंडी में सरकारी समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए परेशान हो रहे हैं क्योंकि मुआवजा लेने की शर्तों के अनुसार यदि किसी ने 75% तक नुकसान दिखाया है, तो वह धान कैसे बेच सकता है? यह सवाल अब खुद किसानों के गले की फांस बन गया है।
डीआरओ (जिला राजस्व अधिकारी) श्यामपाल ने बताया कि राजस्व विभाग की टीम पूरे मामले को लेकर सतर्क है और क्षतिपूर्ति पोर्टल पर जलभराव या अन्य प्राकृतिक आपदा से फसल खराबे की रिपोर्ट का सत्यापन किया जा रहा है। नहला, बैजलपुर, गोरखपुर, दहमान, ढाणी गोपाल, लहरिया और भूना सहित कई गांवों के किसान इस मामले में शामिल हैं। इनमें बड़ी सख्या में किसानों ने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर जलभराव या अन्य प्राकृतिक आपदा से रिपोर्ट दर्ज की थी। कई किसानों ने जानबूझकर अधिक नुकसान दिखाया ताकि उन्हें सरकार से ज्यादा मुआवजा मिल सके। कुछ लोग अब अपनी फसल को औने-पौने दामों में व्यापारियों को बेच रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह पोर्टल से मुआवजे की राशि भी निकल जाए।
राजस्व विभाग के अधिकारी एवं नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार का कहना है कि फील्ड में जाकर मौके पर फसलों की स्थिति का पूरा जायजा लिया गया था। रिपोर्ट में साफ तौर पर सामने आया कि किसानों की फसलें अच्छी थीं और नुकसान का कोई प्रमाण नहीं मिला। इसके बाद संबंधित किसानों के दावे रिजेक्ट कर दिए गए हैं।