- प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया फैसला, 18 महीने जेल में रही थी महिला
- थाना सेक्टर-58 में सितंबर 2013 की घटना, महिला और उसके बेटे पर लगा था हत्या का आरोप
- बेटे का केस जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में विचाराधीन है, आदेश का मिल सकता है लाभ
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा में रहने वाली एक महिला के सिर से 13 साल बाद एक बच्चे की हत्या का आरोप हटा है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने गवाही और साक्ष्यों का आकलन करने के बाद महिला को दोषमुक्त करार दिया। मुख्य गवाहों ने साक्षी होने का दावा किया था, लेकिन क्रॉस एग्जामिनेशन में एक भी गवाह के मौके पर न होने का सच सामने आ गया। मामले में महिला ने करीब 18 महीने जेल की सजा काटी। उसके बाद से जमानत पर जेल से बाहर थी। हालांकि महिला के बेटे का केस अब भी जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में विचाराधीन है। अधिवक्ता का कहना है कि आदेश का लाभ महिला के बेटे को भी मिल सकता है।
अधिवक्ता ने बताया कि घटना नोएडा के सेक्टर-58 कोतवाली क्षेत्र के चोटपुर बहलोलपुर गांव की है। निर्मल परामानिक ने केस दर्ज कराया था कि 29 सितंबर, 2013 की शाम 6 बजे उसका बेटा टोटन मकान के सामने कुल्ला दातून कर रहा था। वहीं पास में निप्पन नाक का लड़का खेल रहा था। दातून के समय कुछ छींटे निप्पन के ऊपर चली गईं। आरोप लगाया है कि इस बात पर निप्पन ने टोटन के साथ गाली गलौज की थी। निर्मल और उसके बेटे ने गाली देने से रोका तो निप्पन की मां राधा हलधर टोटन की गिरेबान पकड़कर उसे मारने लगी। तभी आरोपी निप्पन ने टोटन के सीने में चाकू घोंप दिया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई थी।
पुलिस ने पिता की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। तब निप्पन की उम्र करीब 16 साल थी। राधा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। साथ ही उसके नाबालिग बेटे को बाल सुधार गृह भेजा गया था। पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी, जिस पर प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में सुनवाई चल रही थी। मृतक पक्ष की तरफ से सात गवाह पेश किए गए। इनमें मृतक के पिता व भाई ने मौके पर होने का दावा किया। जबकि फूफा मुकेश सिंह ने तहरीर लिखी। गवाहों में विवेचक, फर्द का साक्षी, पोस्टमार्टम साक्षी भी शामिल रहे। आरोपी पक्ष ने मुकदमा गलत और झूठा लिखवाने और पड़ोसियों के घटना को अंजाम देने का दावा किया। पुलिस से मिलीभगत कर उनको फंसाने का भी आरोप लगाया।
क्रॉस एग्जामिनेशन में मौके पर नहीं मिले साक्षी
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि मृतक के पिता और भाई ने अपने आप को मौके पर बताया था, लेकिन कोर्ट में गवाही के दौरान क्रॉस एग्जामिनेशन में दोनों का झूठ सामने आ गया। घटना के समय दोनों मौके पर नहीं थे। पिता घटना के दिन सेक्टर-62 की एक कंपनी में काम कर रहे थे। 5:30 बजे छुट्टी होने के बाद वो 6 बजे तक घर पहुंचे थे। घटना की सूचना पड़ोसियों ने पुलिस को दी थी। जबकि पहले पिता ने स्वयं फोन करने की जानकारी दी थी। निप्पन को चाकू मारते नहीं देखा था। वह खाना खा रहा था। उसे एक बच्चे ने बताया था। झगड़ा राधा के बेटे व मृतक के बीच हुआ था। इन बातों से तय हुआ कि पिता मौके का साक्षी नहीं था। वहीं मृतक का भाई घटना के समय 10 किमी. दूर था। जब वो मौके पर पहुंचा तो उसका भाई मृत अवस्था में मिला था। वहीं पोस्टमार्टम में हत्या चाकू के वार से होनी स्पष्ट नहीं है। अधिवक्ता ने बताया कि गवाही झूठी निकलने और हत्या चाकू के वार से हत्या की स्पष्ट रिपोर्ट नहीं होने पर कोर्ट ने राधा हलधर को दोषमुक्त करा दिया है।