इंदिरापुरम (गाजियाबाद)। वसुंधरा सेक्टर दो ए निवासी राजेंद्र वर्मा, उनके परिचित पंकज पाराशर और प्रिंस त्यागी से दो लोगों ने बैंक से नीलाम होने वाली संपत्ति कम दाम में दिलाने का झांसा देकर 7.50 करोड़ की ठगी कर ली। पीड़ितों का आरोप है कि शक्तिखंड चार निवासी चंद्रभान रावत और दुहाई निवासी प्रवीण चौधरी ने खुद को अलग-अलग निजी बैंकों का डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (डीएसए) बताया था। आरोपियों ने वैशाली सेक्टर एक में अपना कार्यालय भी खोल रखा था। दोनों पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है। पुलिस ने छह सितंबर की रात मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दर्ज मुकदमे में राजेंद्र वर्मा ने बताया कि चंद्रभान रावत और प्रवीण ने खुद को कई निजी बैंकों का डीएसए बताया। इसके बाद बताया कि वह बैंक की तरफ से होने वाली नीलामी में बिकने वाली संपत्तियों का सौदा कम दाम में करवा सकते हैं। भरोसा जताने के लिए आरोपियों ने उन्हें बिना तारीख लिखा चेक और पासपोर्ट भी दिया था। पीड़ित ने बताया कि इसके बाद आरोपियों ने उनसे 2.65 करोड़, पंकज पाराशर से 4.10 करोड़ और प्रिंस त्यागी से 75 लाख रुपये ले लिए। कुछ रकम संपत्ति दिखाने के बाद ऑनलाइन निजी व व्यावसायिक बैंक खातों में लिए और कुछ रकम नकद ली। इसके बाद जब समय पर संपत्ति निवेशकों को नहीं मिली तब उन्होंने रकम वापस मांगी।
आरोपियों ने एक माह का समय मांगा लेकिन उसके बाद भी रुपये नहीं लौटाए। आरोप है कि जब दोबारा तकादा किया तब आरोपियों ने व्हाट्सएप पर फर्जी यूनिक ट्रांजेक्शन रेफरेंस (यूटीआर) नंबर और आरटीजीएस चेक की फोटो भेज दी। इसके बाद भी जब रुपये नहीं मिले तब उन्होंने आरोपी को कॉल की। बताया कि फोन पर आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी और कॉल कट कर दी। इसके बाद से आरोपियों के मोबाइल नंबर, कार्यालय और घर सभी बंद हैं। एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की शुरुआती जांच के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों के खिलाफ पहले भी लोन दिलाने या संपत्ति दिलाने के नाम पर कई लोगों से आर्थिक धोखाधड़ी करने के सुराग मिले हैं। जांच की जा रही है और आरोपियों की तलाश भी। जल्द ही गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया जाएगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता मिशन का अधिकारी बन 5.25 करोड़ हड़पे
कौशांबी (गाजियाबाद)। मुरादनगर विजयामंडी स्थित नैनी क्रिएशन के मालिक मनोज अग्रवाल से एक महिला समेत पांच लोगों ने सरकारी संस्थानों में योजना सामग्री सप्लाई कराने के बहाने करीब 5.25 करोड़ रुपये ठग लिए। पीड़ित से धोखाधड़ी राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता मिशन (आरजीएसएम) का अधिकारी, निदेशक व उप निदेशक बनकर की गई। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने छह सितंबर की रात आरजीएसएम के तथाकथित निदेशक करुणाकरन उर्फ रत्नाकर उपाध्याय, अनीता उपाध्याय, उप निदेशक सौरभ सिंह, गाजियाबाद के लैंड क्राफ्ट गोल्फ रिंग सोसायटी निवासी प्रवीण अग्रवाल और मयंक गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।
दर्ज मुकदमे में मनोज अग्रवाल ने बताया कि प्रवीण अग्रवाल और मयंक गुप्ता से उनकी व्यापारिक दोस्ती थी। 16 मई 2024 को उनकी दोनों से मुलाकात हुई थी। उस समय दोनों ने उन्हें सरकारी संस्थानों में राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता मिशन के तहत योजना सामग्री सप्लाई कार्य दिलाने का झांसा दिया। बातों में पूरी तरह फंसाने के बाद दोनों ने पहले उनसे 10 लाख रुपये लिए और चले गए। इसके बाद सप्लाई कार्य अनुबंध तैयार कराने के नाम पर 1.15 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। इसके बाद दोनों ने उन्हें कौशांबी स्थित मॉल में राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता मिशन के नाम से संचालित कार्यालय ले गए और उप निदेशक सौरभ सिंह से मिलवाया। तभी फोन पर संस्था के प्रमुख करुणाकर उर्फ रत्नाकर उपाध्याय से बात करवाई। बातचीत के बाद सुरक्षा राशि के नाम पर 50 लाख रुपये उनसे हड़प लिए। इसके बाद आठ जुलाई 2024 को संस्था की तथाकथित निदेशक सुनीता उपाध्याय ने सप्लाई कार्य टेंडर पर हस्ताक्षर करते हुए स्कूली बच्चों के जूते-मोजे सप्लाई का ऑर्डर दे दिया। पीड़ित ने बताया कि उन्होंने 3,39,75,000 रुपये के स्कूली जूते, मोजे बताए गए स्थान पर सप्लाई कर दिए। इसका भुगतान जल्द मिलने का उनसे वादा किया गया। साथ ही उन्हें स्कूल बैग सप्लाई का ऑर्डर दिलाने का झांसा भी आरोपियों ने दिया। इसके लिए अनुबंध के नाम पर 45 लाख रुपये उनसे ले लिए। 26 सितंबर 2024 को उन्होंने 82.60 लाख रुपये के स्कूल बैग सप्लाई कर दिए। इसके बाद वह भुगतान के लिए वह संस्था के अधिकारियों से मिलते रहे लेकिन भुगतान नहीं हुआ। काफी कहने के बाद दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच उन्हें 26 लाख रुपये वापस मिले। बकाया रकम के लिए उन्होंने करुणाकरन से बात की तब उसने उन्हें अपने दिल्ली स्थित कार्यालय बुलाया और बातों के जाल में फंसाकर फिर 10 लाख रुपये ले लिए। कारोबारी ने बताया कि जब उन्होंने अपने स्तर से छानबीन शुरू की तब धोखाधड़ी और जालसाजी का पता चला। सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर गिरोह बनाकर आरोपियों ने उनसे करीब 5.26 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत कमिश्नर से की। एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। आरोपियों को ट्रेस करने के लिए सर्विलांस टीम जुटी है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
बिटकॉइन व क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर साढ़े पांच करोड़ ठगे
गाजियाबाद। बिटकॉइन व क्रिप्टो करेंसी में निवेश कर अच्छा मुनाफा कमाने का झांसा देकर किराना कारोबारी समेत नौ लोगों से साढ़े पांच करोड़ की ठगी की घटना सामने आई है। मामले में किराना कारोबारी की शिकायत पर दिल्ली शाहदरा के दुर्गापुरी चौक निवासी आकाश बंसल व उसकी पत्नी मनीषा बंसल के खिलाफ साइबर थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्जकर जांच शुरू कर दी।
मुरादनगर की मेन रोड स्थित टंकी रोड निवासी नितिन सिंहल किराना कारोबारी हैं। उन्होंने बताया कि 2020 में एक परिचित के जरिये उनकी मुलाकात शाहदरा, दुर्गापुरी चौकी निवासी आकाश बंसल से हुई थी। आकाश ने उन्हें बिटकॉइन व अन्य क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने का सुझाव दिया। दावा किया कि कम समय में ही वह बड़ी कैपिटल खड़ी कर सकते हैं। उसने इस तरह के कई उदाहरण भी दिए। उसकी बातों पर भरोसा करके उन्होंने आकाश को पैसा देना शुरू कर दिया। करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये उन्होंने उसको दे दिए। उनके कहने पर परिचित राहुल शर्मा, अर्पित अग्रवाल, निशांत गर्ग, अंकित गर्ग, बिरेंद्र गुप्ता, प्रशांत गुप्ता, रशीद अली और प्रियांक गोयल ने भी आकाश को पैसा देना शुरू कर दिया। कुल मिलकर उन्होंने साढ़े पांच करोड़ रुपये आकाश को दिए। पूछने पर आकाश बताता था कि उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। वह खुद के वॉलेट से ही पूरा काम करता है। उसने उन्हें बाइनेंस एप का वॉलेट भी दिखाया था। इसमें 3.24 बिटकॉइन और 29 इथेरियम व अन्य क्रिप्टोकरेंसी में रकम निवेश की थी, जो भारतीय मुद्रा में करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये है।
कुछ दिन पहले आकाश की पत्नी मनीषा ने उन्हें कॉल कर बताया कि उनका बाइनेंस एप का वॉलेट हैक हो गया है। पूरी रकम डूब गई है इसलिए वह उनको परेशान न करें। उनको अब कोई पैसा नहीं मिलेगा। तकादा करने पर उसने धमकी दी कि वह उनको झूठे मुकदमे में फंसा देगी। एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह ने बताया कि जांच कराई जा रही है। आरोपी से पूछताछ की जाएगी। शिकायतकर्ता से भी साक्ष्य मांगे गए हैं।
डाक विभाग में नौकरी के नाम पर 1.40 लाख हड़पने का आरोप
लोनी (गाजियाबाद)। बॉर्डर थानाक्षेत्र के सरस्वती विहार निवासी तुषार ने क्षेत्र के ही रहने वाले दीपक और उनके पिता सुदेश कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि दीपक ने डाक विभाग में युवक की नौकरी लगवाने के नाम पर 1.40 लाख रुपये लेकर हड़प लिए। नौकरी न लगने पर जब पीड़ित ने रुपये वापस मांगे तब आरोपियों ने धमकी देते हुए मारपीट कर डाली। पुलिस ने छह सितंबर की रात मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।
तुषार ने बताया कि दीपक ने डाक विभाग में नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। इसके लिए नवंबर 2024 में उन्होंने अपने चचेरे भाई पुनीत वर्मा के बैंक खाते से 35 हजार रुपये दीपक के खाते में भेजे। इसके बाद सात जनवरी 2025 को 33 हजार रुपये और 10 फरवरी 2025 को 72 हजार रुपये आरोपी को दिए। इसके बाद काफी समय तक जब नौकरी से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिली तब उन्हें धोखाधड़ी का शक हुआ। उन्होंने दीपक को फोन करके रुपये वापस मांगे लेकिन आरोप है कि उसने मारने की धमकी दे डाली। इस पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की तब दीपक ने अगस्त 2025 तक रकम लौटाने का वादा किया। आरोप है कि इस समय तक रुपये न मिलने पर वह भाई के साथ दीपक के घर पहुंचे तब उनके पिता सुदेश कुमार ने मारपीट करते हुए झूठे केस में फंसाने की धमकी दे डाली। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की। एसीपी अंकुर विहार ज्ञान प्रकाश राय ने बताया कि रुपयों के लेनदेन से जुड़े बैंक रिकॉर्ड की जानकारी खंगाली जा रही है। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कार्ड बदलकर खाते से निकाले 1.55 लाख
गाजियाबाद। क्रॉसिंग रिपब्लिक में एटीएम से नकदी निकालने गए बुजुर्ग को चकमा देकर शातिर ने कार्ड बदल दिया और उनके खाते से 1.55 लाख रुपये निकाल लिए। इस मामले में बुजुर्ग के बेटे ने शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है।
क्रॉसिंग रिपब्लिक बागू निवासी धर्मेंद्र नागर ने बताया कि उनके पिता प्रीतम सिंह नागर का खाता पीएनबी में है। 28 अगस्त को पिता घर से बागू मेन रोड स्थित एटीएम से दो हजार रुपये निकालने गए थे। तभी बूथ से बाहर निकलने के दौरान एक युवक ने उन्हें अपनी बातों में उलझा लिया और धोखे से उनका डेबिट कार्ड बदल दिया। अगले दिन मोबाइल पर मैसेज आने पर पता चला कि शातिर ने नौ बार में उनके खाते से 1.55 लाख रुपये निकाल लिए। एसीपी वेव सिटी प्रिया श्रीपाल ने बताया कि बूथ पर लगे सीसीटीवी को खंगाला गया है। आरोपियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। जिस खाते में रकम ट्रांसफर हुई है। उसको फ्रीज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
डिजिटल अरेस्ट : देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का डर दिखा 1.08 करोड़ ठगे
गाजियाबाद। साइबर ठगों ने निजी कंपनी में कार्यरत अधिकारी को चार दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 1.09 करोड़ रुपये की ठगी की घटना को अंजाम दिया। आरोपियों ने खुद को पुणे एटीएस का अधिकारी बताया और पीड़ित को देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का डर दिखाकर रकम ट्रांसफर कराई। आरोपी उनसे और पैसा भेजने को कह रहे थे, लेकिन और पैसे का इंतजाम नहीं हुआ। जब आरोपियों को लगा कि उनको और पैसा नहीं मिलेगा तो उन्होंने संपर्क तोड़ दिया। इसके बाद उनको अपने साथ हुई ठगी का पता चला। मामले में साइबर थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्जकर जांच शुरू कर दी।
इंदिरापुरम निवासी शिकायतकर्ता ने बताया कि 25 अगस्त को उनके पास व्हाट्सएप पर कॉल आई। बात करने वाले ने कहा कि वह सदानंद दाते पुणे एटीएस का अधिकारी बाेल रहा है। यह उसकी आईडी पर भी लिखा था। उसने फिर दूसरे व्यक्ति को यह बताकर फोन दे दिया कि यह प्रेमकुमार हैं, जो उससे बड़े अधिकारी हैं। उसने उनको बताया कि उनके खाते में विदेश से मोटी फंडिंग हो रही है। उनका नाम देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की बात सामने आ रही है। इतना सुनकर वह घबरा गए।
जब उन्होंने इसमें मदद करने के लिए बात की तो अगले दिन कहने लगे कि मदद का कोई रास्ता निकालते हैं। फिलहाल अपने खाते में जमा रकम को ट्रांसफर करो। इसकी जांच होगी। यदि कोई ऐसी गतिविधि नहीं होगी तो रकम वापस हो जाएगी। वह इतना डर गए कि उन्होंने कुछ भी नहीं खाया पिया। न ही यह बात किसी को बताई। अगले दिन 26 अगस्त को फिर वीडियो कॉल आई। कहने लगे कि अपने खाते की डिटेल बताओ। ऑडिट होगा, इसलिए तुरंत पैसा ट्रांसफर करो। उनकी पत्नी को जब यह बात पता चली तो उन्होंने भी उनसे बात की।
आरोपियों ने उनसे भी यही बात बताई। 30 अगस्त को उन्होंने फिर से उनसे आरबीआई की जांच के नाम पर 50 लाख और फिर 58 लाख रुपये दूसरी बार में ट्रांसफर कराए। आरोपियों ने उनसे और 20 लाख ट्रांसफर करने को कहा लेकिन उनके पास और पैसा नहीं था। जब आरोपियों को लगा कि अब उनको और कुछ मिलने वाला नहीं है तो उन्होंने संपर्क तोड़ दिया। तब उनको ठगी का पता चला। इस बारे में एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया कि जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनको फ्रीज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आरोपियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।