पुन्हाना। प्रदेश सरकार ने 15 मई से गेहूं की दोबारा से सरकारी खरीद शुरू करने के आदेश दिए थे, लेकिन इसका असर पुन्हाना अनाज मंडी में देखने को नहीं मिला। दो दिन में मात्र 40 क्विंटल ही गेहूूं की खरीद मंडी में हुई, जिसे सरकारी एजेंसियों की बजाय आढ़तियों ने ही खरीदा। वहीं, इस बार पुन्हाना अनाज मंडी में मात्र 55,956 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई, जोकि पिछले साल की तुलना में 6.34 लाख क्विंटल कम है। पिछले वर्ष मंडी में 6.90 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद हुई थी। इससे साफ जाहिर है कि इस बार किसानों ने सरकार को गेहूं बेचने की बजाय या तो अपने घरों में स्टॉक कर लिया है या फिर आढ़तियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ज्यादा में बेच दिया है। इस बात का बल इससे भी मिलता है कि मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने कई आढ़तियों के गोदामों पर छापा मारकर भारी मात्रा में अवैध रूप से रखे गेहूं को जब्त किया है। इन आढ़तियों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया और और मार्केट फीस भी वसूली गई।
पुन्हाना मार्केट कमेटी के सचिव दीपक ने बताया कि इस बार किसानों ने मंडी में गेहूं बेचने के प्रति अधिक रुचि नहीं दिखाई है। इस वर्ष अब तक मंडी में मात्र 55 हजार 956 क्विंटल ही गेहूं की सरकारी खरीद हो सकी है। उनका कहना है कि जबकि सरकार के ऑनलाइन पोर्टल मेरी फसल मेरा ब्योरा पर अकेले पुन्हाना उपमंडल से सैकड़ों किसानों ने करीब 30 हजार एकड़ का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में करीब 20 क्विंटल गेहूं की पैदावार होती है। अकेले पुन्हाना क्षेत्र में ही करीब 6 लाख क्विंटल गेहूं की पैदावार होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि मंडी में इस बार कम अनाज आने के तीन कारण हैं। पहला पड़ोसी राज्य राजस्थान की मंडी में गेहूं 2200 रुपये से अधिक की दर में बिका। जबकि, हरियाणा में सरकारी खरीद 2015 थी। दूसरा कारण ये भी हो सकता है कि किसानों ने कुछ समय बाद गेहूं का मंहगा भाव होने की उम्मीद में अपने घरों पर ही स्टॉक कर लिया है या फिर आढ़तियों से मिली भगत करके उसे अधर में ही बेच दिया।