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प्राधिकरण के दस्तावेजों में 1650 औद्योगिक इकाईयां अकार्यशील

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1650 औद्योगिक इकाइयां अकार्यशील
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प्राधिकरण के दस्तावेज से खुलासा, नहीं ले रहीं कार्यशीलता प्रमाण पत्र
- औद्योगिक भूखंडों के आवंटन के बाद इकाइयों को कराना होता है कार्यशील
सुशील पांडेय
नोएडा। नोएडा में 1650 औद्योगिक इकाइयां अकार्यशील हैं। प्राधिकरण के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं। हालांकि प्राधिकरण का तर्क है कि कई इकाइयां नियम के मुताबिक कार्यशीलता का प्रमाण नहीं दे पा रही हैं, जबकि इनमें से कई भौतिक तौर पर कार्यशील हैं। नियमों पर खरे उतरने पर ही कार्यशीलता का प्रमाण पत्र दिया जा सकता है।
दरअसल, नोएडा प्राधिकरण ने स्थापना के बाद से अब तक 10,244 भूखंडों का आवंटन औद्योगिक इकाइयों के लिए किया है। इसमें फेज-1 में 4801, फेज-2 में 1865 और फेज-3 में 3578 इकाइयों के लिए भूखंड आवंटन हुआ। कुछ दिन पहले तक इनमें से 8355 के कार्यशील होने की बात कही गई। अधिकारियों के मुताबिक, अब यह आंकड़ा 8594 है। प्राधिकरण के अधिकारियों का तर्क है कि औद्योगिक इकाइयों के लिए भूखंड के आवंटन के बाद तीन वर्ष का समय दिया जाता है। इस बीच इकाई को कार्यशील होने का प्रमाण देना होता है। इनमें से करीब 300 ऐसी इकाइयां हैं, जिनकी समय सीमा नहीं बीती है। यानी उनके पास अपने कार्यशील होने का प्रमाण देने का मौका है। 50 इकाइयां ऐसी हैं, जो शासन स्तर पर आई हैं और इनमें कुछ तकनीकी दिक्कतें हैं।
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700 इकाइयां मांग रहीं समय विस्तार
इसके अलावा, करीब 700 इकाइयों के भूखंड आवंटन को तीन वर्ष से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन आवंटियों की ओर से समय विस्तार के लिए आवेदन किया गया है। यानी यह अब तक कार्यशील नहीं हो पाई हैं और आवंटी इसके लिए और समय मांग रहा है।

तकनीकी विवाद में फंसी हैं 250 इकाइयां
प्राधिकरण का कहना है कि फेज-1 में 50 और फेज-दो और तीन में करीब 200 इकाइयां ऐसी हैं, जो भौतिक तौर पर क्रियाशील तो हैं, लेकिन यहां कई तरह के तकनीकी विवाद हैं। इन्हें सुलझाए बिना प्राधिकरण कार्यशीलता का प्रमाण पत्र नहीं दे सकता। इनमें से कई पर जीएसटी, कोर्ट, तहसील से केस हैं।

370 को प्राधिकरण ने भेजा नोटिस
नोएडा प्राधिकरण ने 370 ऐसी इकाईयों को नोटिस भेजा है, जहां किसी तरह का विवाद नहीं है और ये क्रियाशील होने का प्रमाण नहीं दे रही हैं। ऐसी इकाइयों को नोटिस भेजकर प्राधिकरण पेनाल्टी सहित कार्यशील प्रमाण पत्र लेने को कह रहा है। इससे प्राधिकरण के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
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कंपनियां 20 साल से सक्रिय
पर अब लिया प्रमाण पत्र
प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक ,कुछ कंपनियां 20 वर्ष से चल रहीं थीं, लेकिन उन्होंने क्रियाशील प्रमाण के लिए आवेदन नहीं किया था। ऐसी कंपनियों को पिछले 20 वर्ष का बकाया पेनाल्टी के साथ वसूलकर प्रमाण पत्र दिया गया है। ऐसी ही कई कंपनियां हैं, जिनसे पेनाल्टी ली जा रही है।
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