ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी गांव में चल रहे डीएफसीसी के प्रोजेक्ट के बीच आ रही जमीन से घर तोड़ती जिला ?
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दादरी। जिला प्रशासन ने मंगलवार को पुलिस के साथ बोड़ाकी गांव में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन (डीएफसीसी) की ईस्टर्न कॉरिडोर परियोजना के बीच आ रहे पांच मकानों को भारी विरोध के बीच हटा दिया। ग्रामीणों ने प्रशासन पर बिना नोटिस दिए ही घर उजाड़ने का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध किया और दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर लेटकर घर न तोड़ने की मांग भी की, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने ग्रामीणों की एक नहीं सुनी। वहीं, पटरी पर लेटकर विरोध करने के दौरान राजधानी एक्सप्रेस आ गई, लेकिन चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए आपातकालीन ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया। इससे कोई जनहानि नहीं हुई।
दरअसल, ईस्टर्न कॉरिडोर की लिंक रेलवे लाइन बोड़ाकी तक आ रही है। जिले में बोड़ाकी के साथ कई जगह पर जमीन के छोटे-छोटे हिस्सों पर प्रशासन को कब्जा नहीं मिला है। इसमें बोड़ाकी गांव में भी कॉरिडोर के बीच पांच मकान आ रहे थे जो कुलदीप भाटी, प्रवीन कुमार, किरनपाल, साहब सिंह और रामपाल के थे। मंगलवार को दादरी तहसील के एसडीएम आलोक गुप्ता बड़ी संख्या में पुलिस और डीएफसीसी के अफसरों के साथ मकानों को हटाने पहुंचे। सुबह नौ बजे से ही गांव में पुलिस तैनात थी। अचानक पुलिस को देखकर ग्रामीण दंग रहे गए और विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने जमीन का मुआवजा और मकानों की कीमत दिलाने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने किसी की नहीं सुनी। इसके बाद दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर कुछ महिलाएं और पुरुष लेट गए। इसी समय दिल्ली की ओर से डिब्रूगढ़ राजधानी आ गई। पटरी पर ग्रामीणों के होने से पुलिस अधिकारियों में अफरातफरी मच गई।
ग्रामीणों को पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर पटरी से हटाया। आपातकालीन ब्रेक लगाने के बाद राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन दो मिनट तक ठहरी रही। ट्रेन जाने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। इसके बाद पुलिस ने पटरी को दोनों तरफ से घेर लिया और ग्रामीणों को वहां तक जाने नहीं दिया। पुलिस ने विरोध कर रहे ग्रामीणों को हिरासत में लिया। पुलिस ने मकानों में रखे सामान को जबरन बाहर निकाल दिया व पेड़ों और मकानों को बुलडोजर से तोड़ दिया।
...साहब दो दिन की मोहलत दे दो
प्रशासन की कार्रवाई के दौरान महिला कोमल देवी और ममता ने एसडीएम दादरी के सामने गिड़गिड़ाकर दो दिन की मोहलत मांगी। उन्होंने कहा कि साहब दो दिन में मकान खाली कर देंगे। आप भी परिवार वाले हो। हमारा सामान टूट-फूट रहा है। महिलाओं के आग्रह से पुलिस और प्रशासन का दिल नहीं पसीजा और मकानों को हटाने की कार्रवाई जारी रखी। महिलाएं और बच्चे राते रह गए।