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Noida News: करोड़ों का टैक्स देने वाले 25 उद्योग बूंद-बूंद पानी को तरसे

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मनोज गोयल।
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फोटो
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-चोक पड़ी पानी की लाइन चार साल में भी नहीं सुधार सका प्राधिकरण
-उद्योग जरूरतों से लेकर शौचालयों तक पानी के टैंकर के भरोसे उद्योग

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पानी की किल्लत देश के किसी दूर-दराज या पिछड़े गांव में हो, तो संसाधनों की कमी का बहाना समझ में आता है। लेकिन जब उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी और हाईटेक सिटी कहे जाने वाले नोएडा के उद्योग बूंद-बूंद पानी को तरसें, तो व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। नोएडा सेक्टर-58 के करीब 25 उद्योग पिछले चार सालों से पानी की आपूर्ति के लिए तरस रहे हैं। हैरत की बात यह है कि बीते चार साल में भी नोएडा प्राधिकरण यहां की एक चोक पड़ी पाइपलाइन को ठीक नहीं कर सका है, जिससे उद्यमियों में भारी आक्रोश है।
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सेक्टर-58 के उद्यमियों ने बताया कि उद्योगों में पानी की टंकी कब खाली हो जाए, पता नहीं चलता। डर बना रहता है। शौचालयों तक में पानी आना बंद हो जाता है। यह समस्या बनी रहती है। इसका कारण पिछले चार सालों से चोक पड़ी पानी की पाइपलाइन है। स्थायी समाधान प्राधिकरण अभी तक नहीं निकाल सका। उद्यमियों के अनुसार, साल 2022 में उनकी ओर से नोएडा प्राधिकरण से जलापूर्ति ठप होने की शिकायत की थी। तब से सी ब्लॉक के करीब 25 उद्योग ऐसे हैं जहां पर पानी का कनेक्शन तो है, सालाना 20 से 40 हजार रुपए भुगतान भी किया जाता है, लेकिन उन्हें कनेक्शन के जरिए पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में वह टैंकरों की वैकल्पिक व्यवस्था पर बीते चार सालों से निर्भर हैं। उद्यमियों ने बताया कि उन्होंने नोएडा प्राधिकरण को एक बार नहीं बल्कि कई बार पत्र लिखा। लेकिन पाइपलाइन को बदलने के बजाय 15 दिन में एक टैंकर भेजते हैं।
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टैंकर का करते हैं लंबा इंतजार
15 दिन में फोन करके मंगाए जाने वाले टैंकर पर निर्भर हैं। -सुनील वाधवा
पानी न होने से घर जाना पड़ जाता है, कर्मचारी भी घर निकल जाते हैं। -मनोज गोयल
सुबह-शाम को बेहतर जलापूर्ति होनी चाहिए, अन्य ब्लॉकों में सप्लाई है। -अनंतशील
बारिश में अक्सर पानी भर जाता है जो उद्योगों के अंदर तक आ जाता है। -दीपक गर्ग

मनोज गोयल।

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