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अमर उजाला संवाद: किसानों को न मुआवजा मिला न जमीन

Wed, 10 Oct 2018 09:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
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- फोटो : अमर उजाला
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नोएडा सेक्टर-45 धीरे धीरे आबाद हो रहा है। लेकिन जिन किसानों ने इसे बसाने के लिये जमीन दी वह इधर उधर भटकने को मजबूर हैं। कई किसान ऐसे हैं जिन्हें आज तक मुआवजा नहीं मिला। जमीन के बदले कुछ किसानों को प्लाट मिले भी हैं तो वह ऐसी जगह है जहां सिर्फ जंगल है।

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अब इस जगह पर प्राधिकरण ने डंपिंग ग्राउंड बना दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब तक प्राधिकरण को जमीन चाहिए थी तब तक खूब झूठे वायदे किये। अब काम निकलने के बाद गांव की तरफ देखना भी बंद कर दिया। निवासी एडवोकेट एस चौहान ने बताया कि प्राधिकरण ने 2003 में सदरपुर की करीब 679 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की थी।

उस वक्त मुआवजे की दर 384 रुपये प्रति वर्ग गज थी। लखनऊ में बैठकर अफसरों ने पूरे गांव की जमीन कागजों में अधिग्रहीत कर ली। जानकारी मिलने पर किसानों ने जब विरोध किया तो कहा कि जो पुश्तैनी मकान हैं, उनके जमीन का अधिग्रहण हो ही नहीं सकता। 2006 में काफी प्रयास के बाद 97 घर छोड़े गए।
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बना दिया डंपिंग ग्राउंड, कौन खरीदेगा प्लाट...
किसानों ने कहना था कि जब जमीन सदरपुर की ली गई तो उसके बदले किसानों को छिजारसी सेक्टर-63ए व 145 में प्लाट क्यों दिए गए। जबकि जिस गांव की जमीन ली जाती है, उसी गांव के आसपास प्लाट दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन ऐसा नहीं कर किसानों को दूर दराज इलाकों में प्लाट दे दिए। ऐसी हालत में गांव के लोग अपना घर छोड़कर जा भी नहीं सकते। अब सेक्टर-145 में प्राधिकरण ने डंपिंग ग्राउंड बना दिया है, उन प्लाटों को अब कौन खरीदेगा।

किसान पढ़े लिखे नहीं हैं। वह प्राधिकरण के दफ्तर में भी नहीं गए। अफसरों ने मनमाने तरीके से किसानों की जमीन छीन ली। अब सुविधाएं भी नहीं दे रहे।-किरनपाल सिंह, सदरपुर निवासी

जमीन मेरी थी। मुझे ही पता नहीं चला कि प्राधिकरण न कब अधिग्रहीत कर ली। जमीन के बदले 64 फीसदी मुआवजा भी नहीं दिया। कई किसान तो ऐसे हैं जिन्हें मुआवजा नहीं मिला।-शिव दत्त शर्मा, सदरपुर निवासी

प्राधिकरण ने किसानों को उजाड़ने का काम किया है। चंद रुपये देकर जमीन ले ली। किसानों का तो सब कुछ छीन लिया गया है। उनके पास कोई रोजगार भी नहीं हैं।-एनके शर्मा, सदरपुर निवासी

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