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जस्टिस सर्तो को लेकर भी केंद्र-पीठ आमने-सामने
अटार्नी जनरल वेणुगोपाल ने बहस के दौरान मेघालय हाईकोर्ट के एडिशनल जज जस्टिस सोंगखुपचुंग सर्तो को स्थायी जज बनाने से संबंधित कॉलेजियम की छह मार्च की सिफारिश का भी उल्लेख किया। जस्टिस सर्तो गुवाहाटी हाईकोर्ट में तबादले पर काम कर रहे थे। कॉलेजियम ने जस्टिस सर्तो को मणिपुर हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश बनाने की सिफारिश करते हुए कहा था कि वह गुवाहाटी हाईकोर्ट में ही काम करते रहेंगे। एजी ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि यह बहुत ही विचित्र है कि जस्टिस सर्तो को गुवाहाटी हाईकोर्ट में ही काम करने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उस वक्त मणिपुर हाईकोर्ट में मात्र दो ही जज थे। ऐसे में यह नहीं कहा जाना चाहिए था कि जस्टिस सर्तो गुवाहाटी हाईकोर्ट में ही काम करते रहेंगे। उन्हें मणिपुर हाईकोर्ट भेजा जाना आवश्यक था।
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इस पर पीठ ने कहा कि हो सकता है कि कॉलेजियम जस्टिस सर्तो को वापस मणिपुर लाना नहीं चाहती हो। हमें इसका नहीं पता। पीठ ने वेणुगोपाल से कहा कि यह समस्या सिर्फ मणिपुर हाईकोर्ट के साथ ही नहीं है बल्कि ऐसे हालात मेघालय और त्रिपुरा हाईकोर्ट में भी हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने मणिपुर हाईकोर्ट के बारे में पता किया था और एक बार जस्टिस सुधाकर वहां जाएंगे तो जजों की संख्या बढ़कर तीन हो जाएगी और समस्या का समाधान हो जाएगा।
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दस दिन में हलफनामा देने को कहा
पीठ ने अटार्नी जनरल से कहा कि मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा हाईकोर्ट में जजों के खाली पड़े पदों के बारे में दस दिन के भीतर हलफनामा दाखिल किया जाए।
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