फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डीएसजीएमसी अध्यक्ष जीके पर 24 घंटे में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश

विज्ञापन
विज्ञापन
मुख्य खबर....
विज्ञापन

----------------------
गबन के आरोपी जीके पर केस दर्ज करें
-डीएसजीएमसी अध्यक्ष के खिलाफ कोर्ट ने पुलिस को दिए निर्देश, 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट
-कमेटी मेंबर शंटी की शिकायत पर दिए कार्रवाई के आदेश
-शिकायतकर्ता ने लगाया है 51 लाख के गबन का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अदालत ने डीएसजीएमसी (दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके व अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ गबन के आरोपों की जांच के लिए कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। कमेटी मेंबर गुरमीत सिंह शंटी ने इन पदाधिकारियों पर कमेटी के 51 लाख रुपये गबन करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दायर की थी। इतना ही अदालत ने थाना नॉर्थ एवेन्यु एसएचओ को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि जब संज्ञेय अपराध होने की बात सामने आई थी तो एफआईआर क्यों नहीं की गई। इसके लिए एसएचओ पर क्यों न कानूनी कार्रवाई की जाए। मामले की सुनवाई शुक्रवार को फिर होगी।
पटियाला हाउस अदालत की महानगर दंडाधिकारी विजेता सिंह रावत ने मनजीत सिंह जीके समेत छह आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कर 24 घंटे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। पुलिस ने इस मामले में संज्ञेय अपराध की बात सामने आने के बाद भी एफआईआर न करने पर पुलिस को फटकार लगाई है।
विज्ञापन

एसीपी की दलील खारिज
कोर्ट ने संबंधित एसीपी की उस दलील को भी खारिज कर दिया कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा अधिनियम की धारा 32 के मुताबिक कमेटी पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि पुलिस कभी एक तो कभी दूसरा कारण बताकर एफआईआर दर्ज करने से बचती रही है, जिस अधिनियम का हवाला दिया गया है उस धारा में केवल दीवानी मामलों की बात की गई है। दिल्ली पुलिस ने अपनी एटीआर में कहा कि फर्जी बिलों के एवज में चेक जारी कर 51 लाख रुपये की गबन की शिकायत सही है। मामले में आरोपियों ने दो प्रकाशकों के जरिए यह गबन किया था। किताबें खरीदने के नाम पर प्रकाशकों से बिल लिए गए और चेक जारी किए। इसके बाद यह राशि उन प्रकाशकों से नकद वापस ले ली गई।
क्या था आरोप
शिकायतकर्ता शंटी का आरोप था कि कनाडा से एक लाख डॉलर की रकम कमेटी के एक्सिस बैंक खाते में जमा हुई थी। इस राशि को पदाधिकारियों ने निकाला लेकिन उसके बदले में भारतीय मुद्रा बैंक में जमा नहीं की। मनजीत सिंह जीके ने संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह पप्पू, पूर्व महाप्रबंधक हरजीत सिंह , प्रकाशक बावा एंड कंपनी, जोगिंदर सिंह एंड कंपनी के साथ मिलीभगत कर 51 लाख रुपये का गबन किया।
--------------------------
साइड स्टोरी
जीके पर दोहरी मार...
हैड- दिल्ली अकाली दल बादल अध्यक्ष पद भी गया
-सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली इकाई को किया भंग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। शिरोमणि अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने तत्काल प्रभाव से दिल्ली इकाई को भंग कर दिया है। इससे दिल्ली अकाली दल के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके को दोहरा झटका लगा है। हाल ही में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्होंने प्रधान पद से त्यागपत्र दे दिया था।
जानकारी के अनुसार सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली के अलावा राजस्थान व यूपी की इकाइयों को भी भंग किया है, लेकिन दिल्ली इकाई को भंग करना अहम माना जा रहा है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके व उनके साथियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते सुखबीर बादल ने कड़ा रुख अपनाया। दिन प्रति दिन संगतों में बढ़ते रोष के चलते उन्होंने कमेटी कार्यकारिणी को त्यागपत्र देकर नई कार्यकारिणी के गठन का निर्देश दिया था। तभी से जीके पर बादल दल के अध्यक्ष पद से भी त्यागपत्र देने के लिए दबाव बनना शुरू हो गया था। अदालत ने बृहस्पतिवार शाम को जीके व उनके साथियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को लेकर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है। इससे कुछ घंटे पहले ही सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली इकाई को भंग करने का निर्णय कर लिया और बाकायदा इसकी घोषणा भी कर दी।
विज्ञापन

सूत्रों के अनुसार अदालत के कड़े रवैये को देखते हुए पहले ही यह आभास हो गया था कि जीके व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश आ सकता है। बादल ने अपनी व पार्टी की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए यह कदम उठाया है। उनके इस कदम से जीके की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। कमेटी व अकाली दल (बादल ) दिल्ली के अध्यक्ष पद रहते कोई भी सदस्य उनके खिलाफ आवाज नहीं उठा पा रहा था लेकिन अब इस बात की पूरी संभावना है कि जीके के साथी ही उनका साथ छोड़ कर नई कार्यकारिणी में स्थान पाने के लिए पासा पलट लेंगे। कई वरिष्ठ अकाली नेताओं ने तो पहले ही पासा पलट लिया है और उनका कहना है कि पार्टी हाईकमान जो भी निर्णय लेगा वे उसके साथ हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें