न्यूनतम वेतन दिलाने के
लिए संस्थानों पर छापे
- 10 दिन के अभियान में सरकारी व निजी संस्थानों पर कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सोमवार को आपरेशन मिनिमम वेज लांच किया। उत्तर पश्चिमी जिले से शुरू अभियान के पहले दिन 20 स्थानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान अधिकारियों को न्यूनतम मजदूरी न देने, लंबे वक्त से वेतन बकाया होने जैसी शिकायतें मिलीं। सभी नियोक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 दिसंबर को जिले के श्रम विभाग में जवाब देने को कहा गया है।
श्रम मंत्री गोपाल राय ने बताया कि विभाग ने 21 दिसंबर तक चलने वाले अभियान के लिए नौ टीमों बनाई हैं। हर दिन सभी टीमें किसी एक जिले में अभियान चलाएंगी। टीमें सरकारी संस्थानों के साथ निजी अस्पताल, स्कूल, होटल और दूसरे संस्थानों में पहुंच रही हैं। खासतौर से उन संस्थानों पर नजर है, जहां से शिकायतें ज्यादा आई हैं। पहले दिन उत्तर पश्चिमी जिले में 20 जगह कार्रवाई हुई। इसमें निजी और सरकारी स्कूल, अस्पताल व बस डिपो शामिल हैं। गोपाल राय ने बताया कि वह खुद संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल गए थे। वहां आउटसोर्स पर तीन कंपनियां काम कर रही हैं। यहां कई तरह की शिकायतें मिलीं। शालीमार बाग स्थित एक बड़े निजी अस्पताल में भी ईएसआई डाटा में गड़बड़ी मिली है। सभी को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 तारीख को जिला श्रम विभाग में सुनवाई के लिए बुलाया गया है। कोई कंपनी सुनवाई के दौरान जरूरी दस्तावेज देने में नाकाम रही तो नियोक्ता पर कार्रवाई होगी। उन्हें 50 हजार रुपये तक जुर्माने और तीन साल की सजा तक का सामना करना पड़ सकता है।