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अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला-- पंजाब मंडप में डीयू के छात्र लाए अमृतसर की 200 साल पुरानी ठठेरा कला

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अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला
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एसआरसीसी के छात्र लाए 200 साल पुरानी ठठेरा कला
महाराजा रणजीत सिंह के समय की लुप्त हो रही कला को दिया आधुनिक रंग-रूप
- हाथों से तैयार पीतल और तांबे की वस्तुएं आकर्षण का केंद्र
अरुण कुमार
नई दिल्ली। प्राचीन कला शैलियों और उनसे जुड़े उत्पादों से लगाव है तो व्यापार मेले में पंजाब मंडप का रुख जरूर करें। यहां आपको महाराजा रणजीत सिंह के समय में करीब 200 साल पहले शुरू हुई ठठेरा कलाकृतियों के बेहतरीन नजारे आधुनिक रूप में दिखेंगे। लुप्त हो रही ठठेरा कला को बचाने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के छात्रों की टीम काम कर रही है। इन्हीं छात्रों ने अमृतसर के ठठेरों द्वारा हाथों से तैयार पीतल और तांबे की वस्तुओं को दर्शकों के समक्ष नए ढंग में पेश किया है।
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डीयू के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्र रौनक और कुणाल ने बताया कि वे इनएक्ट्स नाम की अंतरराष्ट्रीय संस्था के जरिये अमृतसर के ठठेरा परिवारों को समाज की मुख्यधारा में लाने में जुटे हैं। महाराजा रणजीत सिंह के समय में 1780 के आसपास ठठेरा कला की शुरुआत हुई थी। उस वक्त अमृतसर में ठठेरों के 500 से ज्यादा परिवार थे। अब इनके महज 30 परिवार ही बचे हैं। मशीनें आने से हाथों से बने बर्तनों की मांग खत्म होने से इनके परिवार आर्थिक संकट में आ गए। अब इनकी ठठेरा कला विलुप्त होने के कगार पर है। बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा अनुरीत ने बताया कि अमृतसर स्थित जंदियाला गुरु इलाके के ठठेरा परिवारों को रोजगार दिलाने के लिए उनके कॉलेज के 75 विद्यार्थियों की टीम काम कर रही है। यह इन ठठेरों द्वारा बनाए पीतल और तांबे के बर्तनों की दिल्ली समेत अन्य शहरों में प्रदर्शनियां लगाते हैं। उत्पादों की बिक्री से मिलने वाले रुपये ठठेरा परिवारों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने ठठेरों द्वारा बनाई जाने वाली वस्तुओं को भी मॉर्डर्न लुक देने की कोशिश है, ताकि लोग इन्हें खरीदें। इन उत्पादों में उन्होंने पीतल की परात में घड़ी का डायल लगाकर डेकोरेशन के लिए तैयार किया है। पीतल के गिलास की लंबाई बढ़ाकर उसके तले को काटकर आकर्षक फ्लावर पोट बनाया गया। इसके साथ ही तांबे के कई अन्य उत्पादों को नई तरह तैयार किया है। पंजाब मंडप के कोऑर्डिनेटर गुरप्रीत सिंह ने बताया कि इन छात्रों की प्रतिभा देखते हुए इन्हें सरकारी सहयोग के चलते स्टॉल नि:शुल्क दिया गया है। इनके उत्पाद मंडप में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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