कविताओं के जरिए देश के
जवानों को किया सलाम
- अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और ललित कला महोत्सव में दिखी देशभक्ति
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश के वीर जवानों के नाम संस्कार भारती की ओर से शरद रंगोत्सव का आयोजन किया गया। उत्सव के तहत अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और ललित कला महोत्सव में कवियों ने वीर जवानों के बुलंद हौसलों और जज्बे को अपनी कविताओं के माध्यम से सलाम किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कार भारती के संस्थापक ऋषि बाबा योगेंद्र ने की। कार्यक्रम की शुरूआत में उन्होंने प्रकृति के विधानों और संस्कारों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कैसे ऋषि मुनियों ने शरद पूर्णिमा के महत्व को समझा और बताया कि प्रकृति हमें पवित्रता देती है। मानव सभ्यता को प्रकृति से सीख लेनी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री डॉ महेश शर्मा इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए। इस बीच उन्होंने कवियों की अद्भुत प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि कवि वास्तव में समाज का आइना हैं, जो सच को सच और झूठ को झूठ कहने की हिम्मत रखते हैं और आज हमारी राजनीति कहीं न कहीं कमजोर होती जा रही है और मैं चाहता हूं कि ऐसे लोग राजनीति में खड़े हों जो कविताओं के रूप में सच को सच कहने की हिमत रखते हों।
कवि सम्मेलन की शुरूआत कवियित्री डॉ. सीता सागर ने सरस्वती वंदना से की। कवि मनोज कुमार ने संस्कृति वंदना प्रस्तुत की। कवि बृजेश द्विवेदी की कविता ‘जहां हो गीता और कुरान, वहीं है मेरा हिंदुस्तान...’ ने दर्शकों के रौंगटे खड़े कर दिए। वहीं, कवि धुवेंद्र भदौरिया की कविता ‘शीश भूल आया है...’ की पेशकश से दर्शक स्तब्ध रह गए और पाकिस्तान में सिर कटने के बाद घर लौटे एक भारतीय जवान की कहानी सुनकर आंखों से आंसू आ गए। कवि राधाकांत पांडेय ने कविता ‘झुकने दिया नहीं तिरंगा किसी हाल में भी...’ सुनाई। इसके साथ ही अन्य कवियों डॉ विष्णु सक्सेना, कवयित्री डॉ सरिता शर्मा, कुंवर बेचैन और हरिओम पंवार ने अपनी कविताओं के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया।