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12 हजार का बंदोबस्त न होने से अटकी बंदी की रिहाई

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12 हजार का बंदोबस्त न होने से अटकी बंदी की रिहाई
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- शासनादेश के बाद जेल प्रशासन ने कई संस्था और संगठनों से मांगी थी मदद
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती पर अतिरिक्त सजा काट रहे बंदियों की रिहाई के शासनादेश के बावजूद लुकसर जेल के बंदी सलमान की रिहाई नहीं हो पाई। जेल प्रशासन ने लुकसर कारागार में अतिरिक्त सजा काट रहे बंदी सलमान की रिहाई के लिए आर्थिक दंड का प्रबंध करने का प्रयास किया। जेल प्रशासन ने इस संबंध में कई संगठन व संस्थाओं से मदद मांगी थी लेकिन कोई मदद को आगे नहीं आया। इसके चलते सलमान की रिहाई नहीं हो पाई है। अब, जेल प्रशासन दो अक्तूबर तक बंदी की रिहाई का प्रयास कर रहा है।
जेल प्रशासन के मुताबिक, न्यायालय ने 24 वर्षीय सलमान को दो अलग-अलग मामलों में दो और तीन वर्ष की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने दोनों मामलों में 10 हजार और 4 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया था। अर्थदंड जमा न करने पर 40 दिन अतिरिक्त कारावास का आदेश दिया गया था। सलमान जिला कारागार में तीन साल की सजा पूरी कर चुका है। सलमान की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, इसके चलते वह अर्थदंड जमा नहीं कर पाया और 40 दिन की अतिरिक्त काटनी पड़ रही है। जिसमें सलमान अर्थदंड के बदले कुछ दिनों की सजा काट भी चुका है। कुछ दिन अतिरिक्त काटने के कारण अभी 12 हजार रुपये शेष हैं। शासन ने 25 सितंबर को दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर प्रदेश की जेलों में बंद अतिरिक्त सजा काटने वाले बंदियों की मदद कर रिहाई का आदेश दिया था लेकिन जेल प्रशासन के प्रयास के बावजूद अर्थदंड की व्यवस्था नहीं हुई है।
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सलमान अर्थदंड के बदले जेल में अतिरिक्त सजा काट रहा है। यदि कोई उसके 12 हजार रुपये अर्थदंड को जमा कराता है तो 2 अक्तूबर गांधी जयंती के अवसर पर उसे रिहा कर दिया जाएगा। 25 सितंबर को भी उसकी रिहाई का प्रयास किया गया था लेकिन मदद न मिल पाने के कारण उसकी रिहाई नहीं हो सकी। - सत्यप्रकाश, जेलर, जिला कारागार, गौतमबुद्ध नगर।
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