दिल्ली पुलिस को मिले पांच गेलेंटरी पदक
- डीसीपी, तीन एसीपी व एसआई को दिया गया पदक
-दिल्ली पुलिस देश में सबसे ज्यादा गेलेंटरी पदक पाने वाली पुलिस बनी
- 16 पुलिस अफसर व जवानों को राष्ट्रपति व पुलिस पदक दिए जाने की घोषणा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस को इस वर्ष पांच गेलेंटरी पदक मिले हैं। स्वत्रंतता दिवस की पूर्व संध्या पर डीसीपी समेत पांच पुलिस अफसरों को गेलेंटरी, तीन अफसरों को विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक और 16 अफसर व जवानों को सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस पदक दिए जाने की घोषणा की गई है। दिल्ली पुलिस के अफसरों को गेलेंटरी पदक नीतू दबोधिया व उसके दो साथियों को मुठभेड़ में मार गिराने के लिए दिया गया है। दिल्ली पुलिस देश में सबसे ज्यादा गेलेंटरी पदक पाने वाली पुलिस बन गई है। दिल्ली पुलिस प्रवक्ता कार्यालय के अनुसार दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात रहे डीसीपी संजीव कुमार यादव (अभी स्पेशल सेल में है), एसीपी ललित मोहन नेगी, हृदयभूषण, रमेश चंद्र लांबा और एसआई सुखवीर को गेलेंटरी पदक दिया गया है। इन पुलिस अफसरों ने 24 अक्टूबर, 2013 को रात साढ़े दस बजे सुरेन्द्र मलिक उर्फ नीतू दबोधिया व उसके साथियों को सफेद रंग की आई-20 कार में घेर लिया था। नीतू दबोधिया ने पुलिस की स्कोर्पियो कार पर फायरिंग की थी। इसमें एसीपी मनीषी चंद्रा बाल-बाल बच गए थे।
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डीसीपी संजीव यादव गेलेंटरी पदक लेने वाले नंबर वन अफसर बने
दिल्ली पुलिस के डीसीपी संजीव कुमार यादव देश में सबसे ज्यादा गेलेंटरी पदक पाने वाले अफसर बन गए है। डीसीपी संजीव यादव को अब तक नौ गेलेंटरी पदक मिल चुके हैं। अब उन्हें नौवां गेलेंटरी पदक मिला है। उन्हें पहला गेलेंटरी पदक वर्ष 2007 में मिला था। गेलेंटरी पदक मिलने पर दूसरा स्थान पूर्वोत्तर के एक इंस्पेक्टर का है। उन्हें छह गेलेंटरी मिल चुके हैं। एसीपी ललित मोहन नेगी को तीन गेलेंटरी पदक मिल चुके हैं।
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तीन अफसरों को मिला राष्ट्रपति का पुलिस पदक
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा, एसीपी राजेंद्र सिंह यादव और एसीपी संदीप पाली को विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक दिया गया है। विशेष पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा को गंभीर आपराधिक केसों को सुलझाने के लिए 12 प्रशंसनीय पत्र मिले चुके हैं। सीबीआई में रहते कई अहम केसों सोपियन केस, सिख दंगा विरोधी केस, कोलकाता केरिजवान उर रहमान हत्या केस और एनएचआरएम आदि को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्ष 1986 में एसआई पद पर भर्ती होने वाले एसीपी राजेन्द्र सिंह यादव वर्ष 2016 में एसीपी बने थे। सीपी राजेन्द्र सिंह ने धौला कुंआ गैंगरेप, वसंत विहार (निर्भया गैंगरेप) गैंगरेप, सौम्या व जिगिसा हत्या आदि केसों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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16 अफसरों को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमेन्द्रा कुमार सिंह, अतिरिक्त डीसीपी राजेन्द्र सिंह सागर, एसीपी बिजेन्द्र सिंह राय, संजय दत्त, इंस्पेक्टर विजय कुमार सिंह, सर्वेश कुमार, महिला एसआई अनिला कालिया, निर्मल कुमारी, एसआई मोती लाल, एएसआई रामकिशन, महिला एएसआई रजनी मलिक, हवलदार राजनीश त्यागी, हवलदार रामवीर सिंह, जय भगवान, गजेन्द्र सिंह और महिला हवलदार अंजू संध्या मिंज सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक दिए जाने की घोषणा की गई है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमेन्द्रा कुमार सिंह ने बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन केस, रोमेश शर्मा केस, जी न्यूज एग्जीक्यूटिव के हत्या मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अतिरिक्त डीसीपी राजेन्द्र सिंह ने भी कई केसों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एसीपी बिजेन्द्र सिंह ने मालवीय नगर से दो वर्षीय बच्चे के अपहरण को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बच्चे को मुक्त कराकर दो बदमाशों को गिरफ्तार किया था। एसीपी बिजेन्द्र ने वर्ष 2008 में इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकवादी को भी गिरफ्तार किया था।
एसीपी संजय दत्त दिल्ली में हुए बम धमाकों को भी सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें वर्ष 2005 में गेलेंटरी पदक मिल चुका है। कालकाजी थाने में तैनात इंस्पेक्टर सर्वेश कुमार 18 वर्ष से पुलिस पोस्ट राजपथ के प्रभारी रहते हुए आ रहे हैं। 15 अगस्त व 26 जनवरी के मौके पर से पुलिस पोस्ट बनती है। महिला एसआई अनिता कालिया पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह की पत्नी और पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन टंडन की पत्नी की पीएसओ रही थीं। वह काफी समय से पुलिस आयुक्त कार्यालय में तैनात है।