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बाढ़ का खतरा टलने के बाद राहत शिविरों से अपने आशियानों में लौटे पीड़ित परिवार

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राहत शिविरों से आशियानों में लौटने लगे लोग
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नई दिल्ली। खादर क्षेत्र से यमुना का जलस्तर उतरने लगा है। इसके चलते राहत शिविरों में आश्रय लिए 10 हजार परिवार अब अपने आशियानों में लौटने लगे हैं। बाढ़ का खतरा टलने पर प्रशासन ने राहत शिविरों को शनिवार शाम को बंद करने की घोषणा कर दी है।
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27 जुलाई से यमुना का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने की संभावनाओं के मद्देनजर प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया था। इसके बाद यमुना का जल स्तर खतरे के निशान को पार करते हुए 206.05 मीटर तक पहुंच गया था। इसके बाद यमुना के खादर क्षेत्रों उस्मानपुर गांव, लोहा पुल, नर्सरी पुश्ता मयूर विहार, शकरपुर ठोकर नंबर 10, 11 और 12, गीता कोलानी ठोकर 16, 17 और 18, डीएनडी के नजदीकी क्षेत्र से 10 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया था। इन शिविरों में लोगों को भोजन, पानी, शौचालय, बिजली और मेडिकल जैसी प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की थी। एक अगस्त की रात से यमुना का जल स्तर खतरे के निशान 204.83 से नीचे उतरने लगा। इसके बाद यमुना का जल धीरे-धीरे सिमट गया। इस बाबत 4 अगस्त की शाम को प्रशासन ने शिविरों को बंद करने के निर्देश जारी कर लोगों को उनके घर लौटने का निर्देश दिया है। कुछ परिवार शनिवार शाम को ही अपने घरों में लौट गए और कुछ लोग रविवार को लौटना शुरू हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि यमुना खादर क्षेत्र से बाढ़ का खतरा टल चुका है। इसी के मद्देनजर लोगों को उनके घर लौटने की अनुमति दी गई है।
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