गुरु का आशीर्वाद पाकर धन्य हुए शिष्य
नई दिल्ली। संकल्प, विश्वास, श्रद्धा, आस्था और कर्त्तव्य परायणता का पर्व गुरु पूर्णिमा शुक्रवार को राजधानी में धूमधाम के साथ मनाया गया। शिष्यों ने अपने गुरुओं की तिलक लगाकर एवं आरती उतारकर पूजा की। साथ ही उन्होंने अपने गुरुओं के पांव छूकर आशीर्वाद लिया। शिष्यों ने गुरु दक्षिणा के रूप में गुरुओं को अनेक उपहार भेंट किए।
आसिफ अली रोड स्थित मंदिर श्रीराम हनुमान वाटिका में महंत श्रीरामकृष्ण दास महात्यागी से आशीर्वाद लेने और उनकी पूजा-अर्चना करने का सिलसिला सुबह 5 बजे ही शुरू हो गया। इसी तरह जगतपुरी स्थित मंदिर में महंत गोविंददास महात्यागी और जगतपुर मंदिर में महंत दीनबंधु महाराज की पूजा की गई। कालकाजी मंदिर में महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत की पूजा करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रीराज माता झंडे वाला मंदिर गौरख पार्क में स्वामी राजेश्वरानन्द महाराज के नेतृत्व में उनके शिष्यों ने ब्रह्मलीन श्री श्री 108 राज माता जी महाराज की व्यास गद्दी व समाधि का पूजन किया। सिख समुदाय के लोगों ने गुरुद्वारों में पहुंचकर मत्था टेका। गुरू पूर्णिमा के मौके पर गुरुओं व साधु संतों ने अपने शिष्यों को सफलता का आशीर्वाद देने में कोई कंजूसी नहीं बरती। उन्होंने कहा कि भारत में गुरु एवं शिष्य की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। गुरु की पूजा करके हम उन ऋषि-मुनियों का सम्मान करते हैं जिन्होंने देश को ज्ञान की अपार संपदा प्रदान की। ब्यूरो
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आज से शिवमय हो जाएगी राजधानी
नई दिल्ली। राजधानी शनिवार से शिवमय होनी आरंभ हो जाएगी। दरअसल शनिवार से सावन माह शुरू हो रहा है। इस तरह सावन माह में पूजा अर्चना करने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। वहीं, शिवरात्रि के अवसर पर जलाभिषेक करने के लिए हरिद्वार व गंगोत्री से गंगाजल लाने के लिए कांवड़िया जाने शुरू हो जाएंगे, जबकि एक-दो दिन में दूसरे राज्यों के शिव भक्तों का दिल्ली से कांवड़ लेकर गुजरना आरंभ हो जाएगा। ब्यूरो
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बाबा सावन सिंह महाराज का जन्मदिवस मनाया
नई दिल्ली। बाबा सावन सिंह महाराज का 160वां जन्मदिवस कृपाल बाग में हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। सावन कृपाल रूहानी मिशन के अध्यक्ष संत राजिन्दर सिंह महाराज ने अपने संदेश में कहा कि बाबा सावन सिंह महाराज ने अपने जीवन में लाखों लोगों को प्रभु की ज्योति के साथ जोड़कर उनका ध्यान पिता-परमेश्वर की ओर किया। ऐसे महापुरुष अपने लिए नहीं, बल्कि समस्त संसार के लिए इस धरती पर आते हैं, वे इसके जीते-जागते उदाहरण थे। उन्होंने अपने जीवन में रूहानियत की दौलत को दोनों हाथों से लुटाया। उनके चरणों में जो भी आया, उन्होंने उसे पिता-परमेश्वर से जोड़ दिया क्योंकि एक पूर्ण सतगुरु ही हमें अपने निजधाम सचखंड ले जाने का रास्ता दिखाते हैं। ब्यूरो