पूर्वोत्तर की कला और संस्कृति का दिल्ली में संगम
- कला प्रेमियों के लिए दिल्ली में आदी महोत्सव का आगाज
- आईजीएनसीए में पूर्वोत्तर की कला और संस्कृति को समझने का मिलेगा मौका
- 10 दिनों तक चलेगी प्रदर्शनी, व्यंजनों में भी बहुत कुछ है खास
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हस्तशिल्प प्रेमियों के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर (आईजीएनसीए) फॉर आर्ट में शनिवार को आदी महोत्सव का आगाज हो गया है। इस महोत्सव में खास तौर पर जनजातीय हस्तशिल्प, संस्कृतियों और उनके खानपान को करीब से देखने और समझने का आपको मौका मिलेगा। यह प्रदर्शनी 29 जुलाई तक चलेगी। प्रदर्शनी के पहले दिन दर्शकों ने इसका खूब आनंद लिया।
जनपथ स्थित आईजीएनसीए की ट्विन आर्ट गैलरी में दर्शक इस प्रदर्शनी का लुत्फ उठा सकते हैं। प्रदर्शनी में पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय समुदायों के पारंपरिक संस्कृतियों से जुड़ी हस्तशिल्प कलाओं को दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया गया है। प्रदर्शनी की खासियत यह है कि यहां पर आने वाले दर्शकों को पूर्वोत्तर की हस्तशिल्प कलाओं के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों के लजीज व्यंजनों को भी बखूबी परोसा गया है।
दर्शकों के लिए प्रदर्शनी में जनजातीय कपड़ों की किस्में, आदिवासी ज्वेलरी, जिसमें मोतियों से की गई कढ़ाई, डोकरा, स्टोन माला व लकड़ी के गहने सजाए गए हैं। इसके साथ ही यहां जनजातीय पेंटिंग्स के जरिए दर्शकों को आदिवासी जीवनशैली को बखूबी देखने व समझने का मौका मिलेगा। साथ ही पर्वतीय क्षेत्र की प्रकृति से भी रूबरू होने का मौका मिलेगा। वहीं, दर्शकों के लिए मेटल से बनी खूबसूरत वस्तुएं भी महोत्सव में रखी गई है। जिनमें जनजातीय झिटकू मितकी, जाली, मदिया मदिन की कांसे की मूर्तियां और टोडी समेत आदि शामिल है। घरेलू वस्तुओं के साथ-साथ प्रदर्शनी में पूर्वोत्तर भारत के नेचुरल और ऑर्गेनिक उत्पाद भी महोत्सव की शोभा बढ़ाते नजर आएंगे। जिनमें मणिपुरी शहद, चाय और मेवे आदि खाद्य पदार्थ शामिल हैं।