पश्चिम एशिया के तनाव से आपूर्ति श्रंखला में पड़ने वाले असर के चलते अब प्लास्टिक और धातु उद्योग पर असर दिखने लगा है। पीवीसी (पॉली विनाइल क्लोराइड) रेजिन के दामों में हाल के दिनों में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी से पाइप, फिटिंग, केबल, प्रोफाइल, शीट और अन्य प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली इकाइयों पर लागत का दबाव बढ़ गया है।
व्यापारियों के अनुसार, पीवीसी के दानें खनिज तेल से बनते हैं। लेकिन मध्य एशियाई देशों में ईरान की ओर से लाइन ऑफ होर्मुज बंद कर देने से भारत के सैकड़ों टैंकर फंसे हैं। इसके चलते खनिज तेल आयात मुश्किल में पड़ गया। नतीजतन पहले से रखा स्टॉक अब लोग नहीं निकाल रहे, जो माल आ रहा है, वह महंगे दाम पर आ रहा है।
व्यापारी विकास जैन के अनुसार, 25 फरवरी तक पीवीसी ऑयल 45 रुपए प्रति किलो आता था, जो अब 58 प्रतिकिलो हो गया। इसी तरह पीवीसी के दाने 73 रुपये प्रतिकिलो से बढ़कर 90 रुपये प्रति किलो हो गया है। यही कारण है कि जो ऑर्डर अब तक दिए गए थे, वह व्यापारियों को रद्द करने पड़े। इस महंगाई की मार सीधा व्यापारियों पर पड़ रही है। नोएडा ग्रेनो की कुछ एमएसएमई इकाइयों ने नए ऑर्डर लेने में सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो निर्माण कार्यों की रफ्तार पर भी असर पड़ सकता है।
क्या है पीवीसी
व्यापारियों के अनुसार, पीवीसी एक महत्वपूर्ण पॉलिमर है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक से होता है। इसमें एथिलीन (जो पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस से प्राप्त होता है) और क्लोरीन का उपयोग किया जाता है। निर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाले पाइप, दरवाजे-खिड़की, विद्युत केबल, फ्लोरिंग शीट और मेडिकल उपकरणों में भी इसका व्यापक इस्तेमाल होता है।
सरिया समेत लोहे के उत्पादों के दाम भी बढ़े
लोहा व्यापारियों के अनुसार, सरिया समेत लोहे के तमाम उत्पाद भी महंगे हो रहे हैं। 25 फरवरी तक जहां गार्टर सरिया के दाम 43 रुपए प्रति किलो था, वह अब 48 रुपए प्रति किलो, साथ में जीएसटी के साथ बढ़ गया है।