महिला सुरक्षा के लिए खर्च नहीं हो पा रहा निर्भया फंड
गुरुग्राम। दिल्ली में हुए निर्भया कांड को छह वर्ष हो गए हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने निर्भया फंड की व्यवस्था की थी, लेकिन वर्ष 2013 में शुरू हुए इस फंड का इस्तेमाल करने में हरियाणा सरकार फिसड्डी है। बीते तीन वर्षों में राज्य सरकार केंद्र द्वारा जारी निर्भया फंड का आधा ही इस्तेमाल कर सकी, जबकि बाकी रकम केंद्र को वापस लौटानी पड़ी। इसमें महिला संबंधित मामले जैसे सुरक्षा, प्रताड़ना, दुष्कर्म व घरेलू हिंसा सहित अन्य मामलों में पीड़ित महिलाओं को मुआवजा समेत सुरक्षा के माकूल बंदोबस्त के लिए इस फंड का इस्तेमाल होना था।
केंद्र से फंड जारी होने के बाद भले ही हरियाणा सरकार ने आधा खर्च किया, लेकिन गुरुग्राम जिले तक इस फंड को पहुंचने में 05 वर्ष का समय लगा। इस फंड का इस्तेमाल करते हुए अगस्त 2017 में सिविल लाइन में वन स्टॉप सेंटर फॉर वूमेन की शुरुआत की गई। इसमें सरकार की ओर से 2017 में निर्भया फंड में 18 लाख रुपये दिए गए, जबकि खर्च मात्र 35 हजार रुपये ही किए गए। महिला एवं बाल विकास के अनुसार, वन स्टॉप सेंटर पहले नागरिक अस्पताल के एक छोटे से कमरे में चल रहा था। अभी दो माह पहले ही बाल उद्यान में ही सेंटर खोला गया है, इसलिए 2017 में फंड की राशि का ज्यादा उपयोग नहीं हो सका। 2018 में भी 18 लाख रुपये फंड में आए।
2018 में 13 लाख हुए खर्च
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी सुनैना ने बताया कि अप्रैल में 2018 में वन स्टॉप सेंटर फॉर वूमेन के लिए 18 लाख की राशि फंड में आई थी, जिसमें अब तक 13 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। यह पैसे वन स्टॉप सेंटर के स्टाफ के वेतन व सेंटर में बेड, पंखे, बर्तन, फ्रिज, पर्दे व महिलाओं की जरूरत के सामान, महिलाओं की काउंसलिंग, उनके इलाज पर खर्च किए गए हैं। हालांकि सेंटर में स्टाफ की कमी है। अभी तक कुल तीन स्टाफ ही सेंटर को चला रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से रिक्त स्थानों की पूर्ति के लिए नियुक्ति की जा रही है।
क्या है निर्भया फंड
निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक कोष की जरूरत महसूस की गई थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार ने 2013 के बजट में निर्भया फंड की घोषणा की। उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने शुरुआती तौर पर 1000 करोड़ का आवंटन भी किया। 2014-15 और 2016-17 में एक-एक हजार करोड़ और आवंटित किए गए। गृह मंत्रालय द्वारा इस फंड के लिए आवंटित धन का मात्र एक फीसदी खर्च होने की वजह से साल 2015 में सरकार ने गृह मंत्रालय की जगह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को निर्भया फंड के लिए नोडल एजेंसी बना दिया।
मुआवजे का भी है प्रावधान
निर्भया फंड के तहत पीड़िताओं को कानूनी और आर्थिक मदद का प्रावधान है। कोर्ट द्वारा पीड़िता को मुआवजा तय किया जाता है। हालांकि गुरुग्राम में अभी तक 10-15 फीसदी मामलों में ही मुआवजा मिल सका है। कई मामले कोर्ट में लंबित हैं। विभिन्न मामलों में पीड़िता की पैरवी करने वाली फरिश्ते ग्रुप की अधिवक्ता अंजू रावत नेगी बताती हैं कि कई मामलों में कोर्ट ने 05 लाख रुपये तक मुआवजा तय किया है।
आंकड़ों पर एक नजर
वित्तीय वर्ष केंद्र द्वारा जारी रकम खर्च
2015-16 87,98,870 शून्य
2016-17 2,45,76,900 1,52,89,570
2017-18 3,31,80,700 1,47,41,000
(आरटीआई से प्राप्त जानकारी: केंद्र से हरियाणा को मिली रकम का ब्योरा)
चार माह में गुरुग्राम सेंटर में आए मामले
अगस्त -2018
घरेलू हिंसा-10
दुष्कर्म -4
पॉक्सो-8
लापता-3
सिंतबर-2018
घरेलू हिंसा-4
दुष्कर्म -1
पॉक्सो-1
लापता-1
अक्तूबर से नवंबर 2018
घरेलू हिंसा-16
दुष्कर्म -14
अन्य- 31
लापता-1