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हेडिंग: प्रशासन-प्राधिकरण की लापरवाही का बिल्डरों ने उठाया फायदा
मुआवजे के पेच ने इस अवैध काम को आगे बढ़ाने में की मदद
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन के तालमेल की लापरवाही ने छोटे बिल्डरों को गांवों में ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी करने का मौका दे दिया। कहीं अधिग्रहीत तो कहीं अवैध कब्जा कर बिल्डरों ने इमारतें खड़ी करके खूब पैसा कमाया। यहां सस्ते मकान के लिए लोग अभी भी फंसते चले जा रहे हैं।
दरअसल, नोएडा प्राधिकरण ने अधिसूचित जमीन के अधिग्रहण के लिए काफी पहले से कवायद शुरू की। कई गांवों में जमीन का अधिग्रहण कर लिया। अधिग्रहण के बाद सरकारी दर पर मुआवजे की राशि जिला प्रशासन के पास जमा करा दी। प्राधिकरण ने यह सोचकर जमीनें वैसे ही छोड़ दी कि किसान मुआवजे का पैसा जिला प्रशासन से ले लेंगे, लेकिन अधिकांश किसानों ने मुआवजे का पैसा नहीं उठाया और उस जमीन को अपनी ही समझते रहे। जिला प्रशासन ने भी यह नहीं बताया कि कितने किसानों ने मुआवजा उठा लिया है और कितनों ने नहीं। जब यहां बड़ी बड़ी इमारतें बन कर तैयार हो गईं और प्राधिकरण की टीम अभियान के तहत मौके पर पहुंची तब यह बात खुलकर सामने आई कि मुआवजा नहीं उठाया गया है।
कोर्ट में भी है अतिक्रमण का मामला
गढ़ी चौखंडी में अतिक्रमण की बात कोर्ट तक पहुंच गई। वहीं के स्थानीय लोगों ने अतिक्रमण की बात कोर्ट तक पहुंचाई। याचिका पर अभी भी सुनवाई चल रही है। हालांकि इसमें प्राधिकरण का दोष है या नहीं यह कोर्ट की सुनवाई के बाद ही पता चल पाएगा।
विकास कार्य तक को अहमियत नहीं देते बिल्डर
गांवों में बिल्डरों के नेटवर्क को फायदा पहुंचाने के लिए विकास कार्य को भी लोग अहमियत नहीं देते। कई गांवों में ऐसी इमारतें उन स्थानों पर बना दी गईं, जहां से नोएडा के विकास का रास्ता निकलता है। प्राधिकरणों को ऐसी इमारतों को गिराने या सील करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है।