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Noida News: बुजुर्ग व उनकी बहू को डिजिटल अरेस्ट रखकर 12.5 लाख वसूले

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लखनऊ। साइबर ठगों ने बंगला बाजार निवासी बुजुर्ग नरेंद्र कुमार मौर्य व उनकी बहू कामिनी को पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 12.5 लाख रुपये हड़प लिए। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान टेरर फंडिंग का आरोप लगाकर झांसे में लिया। पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
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साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव ने बताया कि सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त नरेंद्र को ठगों ने 30 सितंबर को व्हाट्सएप कॉल किया। खुद को पुलिस अफसर बताते हुए उन पर टेरर फंडिंग का आरोप लगाकर जेल भेजने की धमकी दी। नरेंद्र से कहा कि आपके खाते से पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को पैसे भेजे गए हैं। नरेंद्र के इन्कार करने पर ठग ने कॉल दूसरे जालसाज को ट्रांसफर कर दी। उसने भी धमकाया और जेल भेजने की बात कही। घबराकर नरेंद्र ने फोन काट दिया और बहू को जानकारी दी। थोड़ी देर बाद ठगों ने फिर से फोन किया और व्हाट्सएप पर वारंट भेजे। इसके बाद वीडियो कॉल कर पुलिस ऑफिस का सेटअप दिखाया।

ठग ने अपना नाम प्रेम कुमार गौतम बताते हुए बैंक खातों की जांच करने की बात कही। इसके बाद दोनों को पांच दिन तक झांसे में रखकर कई बार में 12.5 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। ठगों ने कहा कि जांच में सही मिलने पर रकम लौटा दी जाएगी। ठग दबाव डालकर और रकम भेजने के लिए कहने लगे। संदेह होने पर कामिनी ने फोन काट दिया और पति को जानकारी दी। इसके बाद पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। पुलिस का कहना है कि ठगों ने जिन खातों में रकम मंगाई थी, उनकी छानबीन की जा रही है।
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डिजिटल अरेस्ट से बचना है तो इन बातों का रखें ध्यान...

ज्यादातर साइबर ठग व्हाट्सएप पर ही कॉल करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि अनजान नंबरों से आने वाले व्हाट्सएप कॉल न उठाएं।
कोई भी व्हाट्सएप पर कॉल करके आपको अपराधी बताए, वारंट भेजे या गिरफ्तारी की बात करे तो भयभीत न हों। उसे कहें कि लोकल पुलिस के साथ वारंट लेकर घर पर आए।

कोई भी अपराध हो, हमारे देश में डिजिटल अरेस्ट का प्रावधान नहीं। ना ही फोन कॉल पर कोई अधिकारी आपकी जांच कर सकता है।
कोई फोन पर कहे कि आपका बैंक अकाउंट, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड ब्लॉक किया जा रहा है तो डरें नहीं। कोई भी एजेंसी फोन पर सूचना देकर ऐसी कार्रवाई नहीं कर सकती।

कोई भी कॉल करके ये कहे कि आपका बेटा, बेटी या कोई अन्य रिश्तेदार गैरकानूनी कार्य में गिरफ्तार किया गया है तो परेशान न हों। भले ही वो आपके परिचित से कॉल पर बात भी कराए तो भी समझदारी से काम लें। ऐसे सभी मामले झूठे होते हैं।
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यहां करें शिकायत
साइबर ठगी या डिजिटल अरेस्ट का शिकार होने पर साइबर क्राइम थाने, साइबर सेल, लोकल पुलिस स्टेशन, टोल फ्री नंबर 1930 पर जल्द से जल्द सूचित करें। समय से सूचित करने पर ठगी की रकम वापस पाना मुमकिन होता है। या फिर www.cybercrime.gov.in वेबसाइट के जरिये शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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