आज भी लगता है डर, कोई और ना बने निर्भया
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पब्लिक ट्रांसपोर्ट व रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं के लिए हालात ज्यादा नहीं बदले हैं। आज भी अकेले चलने में महिलाएं डरती हैं। दुष्कर्म, छेड़छाड़ जैसी घटनाओं के बारे में अक्सर सुनने को मिल जाता है। ऐसी स्थिति में बदलाव के लिए महिलाओं की नियुक्ति पुलिस व प्रशासन के पदों पर बढ़ाई जानी चाहिए।
- माला अरोड़ा, उद्यमी
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महिला होना अपने आप में किसी चुनौती से कम नहीं है। हर कदम पर हमें संघर्षों का सामना करना पड़ता है। सड़कों से लेकर घरों तक महिलाएं खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करती हैं। उन्हें अजीब डर सताता रहता है ।
- अल्पना चौहान, उद्यमी
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वक्त के साथ लोग निर्भया कांड को भूलते जा रहे हैं, लेकिन उससे कोई सबक नहीं लिया गया है। आज भी महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की अनदेखी की जाती हैं। जो सही नहीं है।
- आलिया अली, नौकरीपेशा