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छात्राऐं 1100 और कमरा मात्र 8 कैसे होवे पढाई

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बदहाली:
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ये कैसे संसाधन, आठ कमरे और छात्राएं 1100
- वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल का खंडहर भवन टूटने के एक साल बाद भी नया भवन नहीं बना

पुन्हाना। शिक्षा विभाग पिनगवां के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का भवन तोड़कर बनाना भूल गया है। अपना भवन न होने की वजह से वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की करीब 800 छात्राएं पिछले एक साल से प्राइमरी स्कूल में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। जबकि प्राइमरी कक्षाओं में पहले से ही करीब 300 छात्राएं पढ़ रही हैं। यानी मात्र आठ कमरों में 1100 छात्राओं को पढ़ाया जा रहा है। पिनगवां के वरिष्ठ कन्या माध्यमिक विद्यालय का भवन विभाग ने करीब एक साल पहले खंडहर होने के कारण तोड़ दिया था। लेकिन अभी तक नया भाव बनने की कोई पहल नजऱ नहीं आ रही है।
कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पिनगवां के प्रिंसिपल शमीम खान के मुताबिक, करीब 50 साल पुराने प्राइमरी स्कूल भवन में ही उनका स्कूल चल रहा था। सरकार ने इस स्कूल को मिडिल, हाई और उसके बाद वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तो अपग्रेड कर दिया था लेकिन सरकार ने स्कूल को अपग्रेड करने के बाद कमरे नहीं बनाए थे। जिसकी वजह से पिनगवां वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय की छात्राएं पिछले 30 साल से पुराने स्कूल के छह कमरों में ही पढ़ाई कर रही थी। स्कूल का नया भवन बनाने के लिए विभाग ने फरवरी 2018 को में खंडहर भवन तोड़ दिया था। उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों के आदेश पर वरिष्ठ विद्यालय की छात्राओं को नए प्राइमरी गर्ल्स स्कूल में शिफ़्ट कर दिया था। तभी से इनकी कक्षाएं प्राइमरी स्कूल में ही चल रही हैं।
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उन्होंने बताया कि खंडहर भवन को फरवरी 2018 में तोड़े जाने के एक साल बाद भी उनके स्कूल के नए भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। जिसकी वजह से छात्राओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 800 और प्राइमरी में 300 छात्राएं शिक्षा गृहण कर रही हैं। बैठने के लिए मात्र आठ ही कमरे हैं। पर्याप्त कमरे न होने की वजह से छात्राओं को गर्मी-सर्दी में बाहर बैठना पड़ रहा है।
अध्यापक मुकेश कुमार ने बताया कि प्राइमरी स्कूल में कुल 11 कमरे हैं, जिनमें से एक हेडमास्टर प्राइमरी, प्रिंसिपल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, एक स्टोर और एक सीआरसी कार्यालय चल रहा है। मात्र आठ कमरों में 1100 छात्राएं कैसे पढ़ सकती हैं। इसलिए मजबूर होकर उनको बरामदों में और बाहर बैठाना पड़ता है।

- जुआरियों और ताश खेलने वालों का अड्डा बना
पुराने स्कूल के कमरों को तोड़ दिए जाने के बाद अभी तक कोई निर्माण कार्य शुरू ना होने की वजह से यह अब जुआरियों और ताश खेलने वालों का अड्डा तो बन ही गया है। साथ ही खुली जगह होने की वजह से यहां लोग इसे पेशाब घर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
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- क्या कहते हैं डीपीसी
डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी एवं डीपीसी अनूप जाखड़ का कहना है कि पिनगवां स्कूल का भवन बनाने के लिए इस्टीमेट सरकार को भेजा जुआ है। उम्मीद है कि जल्द पैसा मंजूर हो जाएगा। उसके बाद स्कूल का तेजी से निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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