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मिलावटखोर हुए सक्रिय, मुनाफा कमाने के लिए मिठाईयों में मिलावट का धंधा जोरों पर

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दिवाली पर मिलावटखोर हुए सक्रिय
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मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए खतरनाक रंगों का हो रहा है प्रयोग
अमर उजाला ब्यूरो
तावडू। दिवाली में मिठाइयों की बढ़ती मांग को देखते हुए जिले में मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। अधिक मुनाफा कमाने के लिए खाद्य पदार्थों में मिलावट का धंधा जोरों पर है। उन पर प्रशासन सख्त नजर नहीं आ रहा है। जिसकी वजह से उनके हौसले बुलंद है। लोगों ने मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
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ज्ञात हो कि 7 नवंबर को दिवाली आने वाली है। इसके लिए लोग अभी से तैयारी में जुटे हैं। हलवाइयों द्वारा जोर शोर से मिठाइयां तैयार की जा रही हैं। शहर में दुकानों के साथ आसपास कॉलोनियों में भी गोदामों में मिठाइयां तैयार की जा रही हैं। इस पर्व पर मिठाइयों की मांग बहुत ज्यादा बढ़ी हुई रहती है। इसे देखते हुए मिलावटी मिठाइयों का धंधा करने वाले लोग भी पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार हलवाइयों द्वारा मिठाइयों में इस तरह मिलावट की जाती है। जिसका लोगों का पता तक नहीं लगता है। बड़े प्रतिष्ठानों में कई दिनों से एकत्र किए गए मावा से मिठाइयों को बनाने का कार्य हो रहा है। मावा में आरारोट, शकरकंद, आलू ही नहीं बल्कि कई प्रकार के केमिकल्स भी मिलाए जाते हैं। मिठाइयों को आकर्षक व खूबसूरत बनाने के लिए खतरनाक रंगों का प्रयोग खुलेआम हो रहा है। जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। लोगों का कहना है कि यह खेल चंद पैसे की खातिर दुकानदार करते हैं। ऐसा कर वह लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे दुकानदारों को चिन्हित कर उनके प्रतिष्ठान पर छापेमारी अभियान चलाना चाहिए। आरोप है कि जब खाद्य विभाग की टीम छापेमारी के लिए पहुंचती है, तो खबर लगते ही अधिकांश दुकानदार अपनी दुकानों को बंद कर भाग जाते हैं। इस कारण टीम एक दो दुकानों का सैंपल ही भर कर चली जाती है। जिसकी वजह से अक्सर मिलावट खोर बच निकलते हैं। लोगों ने प्रशासन से एक साथ कई टीमें गठित कर मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाने की मांग की है।
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