हेडिंग: पटरी से उतरी गारमेंट इंडस्ट्री, 100 करोड़ का झटका
सबहेड: ट्रांसपोर्टर की हड़ताल का असर, जिले की 2 हजार इकाइयों में 50 फीसदी गिरा उत्पादन
14 हजार करोड़ रुपये इन उद्योगों का सालाना टर्नओवर
10 लाख श्रमिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। ट्रांसपोर्टरों की बेमियादी हड़ताल खत्म हो गई है, लेकिन इससे नोएडा की गारमेंट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को पटरी से उतर गई है। सबसे ज्यादा रोजगार और टर्नओवर वाली इस इंडस्ट्री को हड़ताल के कारण करीब 100 करोड़ रुपये के नुकसान का बताया जा रहा है। 2 हजार इकाइयों में कपड़े की आपूर्ति ठप होने से उत्पादन 50 फीसदी तक गिर गया है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा की गारमेंट इकाइयों में कपड़े की आपूर्ति मुंबई, सूरत के अलावा दक्षिण भारत के सेलम सहित तमाम शहरों से होती है। नोएडा एपरैल एक्सपोर्ट कलस्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित ठुकराल ने बताया कि ट्रांसपोर्टर हड़ताल से मिल बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। एक सप्ताह पहले बुकिंग कराने के बाद भी कपड़े की आपूर्ति नहीं की जा सकी। इससे करीब दो हजार गारमेंट इकाइयों में उत्पादन आधा हो गया। जिले की गारमेंट इंडस्ट्री से सालाना 16 हजार करोड़ का टर्नओवर होता है यानी रोजाना 35 से 40 करोड़ रुपये टर्नओवर करने वाली कंपनियों को पिछले आठ दिन में करीब 100 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है।
ऑर्डर लेट, जुर्माना शुरू
गारमेंट एक्सपोर्टरों का कहना है कि विदेशी बायर्स के साथ एग्रीमेंट होता है। ऑर्डर अगर 10 दिन लेट होता है तो एक्सपोर्टरों को 25 प्रतिशत डिस्काउंट देना पड़ जाता है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह जुर्माना ही है। हड़ताल की वजह से ऑर्डर लेट हो चुके हैं और जुर्माने का सिलसिला शुरू हो चुका है।
एनईए ने मांगा सहयोग
नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन (एनईए) ने हड़ताल से उद्योगों पर पड़ रहे असर को ध्यान में रख ट्रांसपोर्टरों से सहयोग की अपील की गई थी। एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन ने शुक्रवार को ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों से वार्ता भी की।