एमएसएमई संशोधन विधेयक का विरोध शुरू
- लघु उद्योग भारती ने पीएम को पत्र लिखकर दिया सुझाव
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा।
लोकसभा में पेश किए गए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास संशोधन विधेयक-2018 के विरोध में आवाज उठने लगी है। इस विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद एमएसएमई की परिभाषा बदल जाएगी। लघु उद्योग भारती ने इस विधेयक को सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए अहितकारी बताते हुए नए मानदंड लागू न करने की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की है।
लघु उद्योग भारती के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जीएसटी काउंसिल की सलाहकार समिति सदस्य ओमप्रकाश मित्तल ने फिल्मसिटी स्थित वास्मे हाउस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद उद्योगों का वर्गीकरण प्लांट व मशीनरी में निवेश के बजाय उनके कारोबार के आधार पर होगा। मसलन, 5 करोड़ रुपये तक कारोबार वाली इकाइयां सूक्ष्म, 5 से 75 करोड़ रुपये तक लघु और 75 से 250 करोड़ रुपये तक कारोबार करने वाली इकाइयां मध्यम श्रेणी में मानी जाएंगी। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर सूक्ष्म और लघु उद्योगों के सामने बड़ी दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। इसका बुरा असर मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों पर पडे़गा, क्योंकि ट्रेडर्स, निर्यातक और सर्विस प्रोवाइडर भी एमएसएमई के तहत मिलने वाली सब्सिडी आदि सुविधाओं का फायदा उठाएंगे।
संगठन की ओर से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि सूक्ष्म, लघु व मंझोले उद्योगों (एमएसएमई) के वर्गीकरण के लिए नए मानदंडों को लागू न किया जाए। एमएसएमई का वर्गीकरण निवेश पर ही आधारित होना चाहिए। उद्यमियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना बनाई जानी चाहिए। लघु उद्योग भारती नोएडा अध्यक्ष मंजुला मिश्रा ने उपस्थित उद्यमियों को भारत सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की सलाह दी। इस मौके पर नीति आयोग के उद्यमिता सलाहकार अनुराग मित्तल, संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जनक भटिया, विजय ढल, रवि सलोत्रा, पीएस चौहान, सत्येंदर वालिया, डॉ. चंचल वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।