दहेज हत्या के दो दोषियों को दस-दस साल कैद
नूंह। दो साल पहले फिरोजपुर झिरका थाने के गांव बघौला में दहेज के लिए की गई दो बच्चों की मां की हत्या के मामले में नूंह अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने दो दोषियों को दस-दस साल की कैद और दस-दस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना ना भरने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी पडे़गी। सजा का ऐलान होते ही दोनों दोषियों को सोमवार को जेल भेज दिया गया है।
पीड़ित पक्ष के वकील एवं नूंह बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान ताहिर हुसैन रूपडिया ने बताया कि नूंह थाने के गांव नौसेरा निवासी हाजी नसरू पुत्र मल्लाह ने फिरोजपुर झिरका थाने में अपनी भतीजी की दहेज की मांग पूरी न करने पर हत्या किए जाने का मामला दर्ज कराया था। 3 मई 2017 को फिरोजपुर झिरका थाने में दी शिकायत में उसने गांव बघौला निवासी हिदायत, सररा, सफी मोहम्मद, गफौंदी, जफ्फर और फिररा सहित 6 लोगों पर आरोप लगाया था। पुलिस ने मामले की जांच की तो चार आरोपियों को बेगुनाह पाते हुए उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया था। सोमवार को नूंह जिला अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रजनी यादव ने मृतक महिला के पति हिदायत और देवर सररा को दहेज हत्या का दोषी पाया। इसके बाद अदालत ने दोनों की सजा का ऐलान किया।
वहीं पीड़ित हाजी नसरू निवासी नौसेरा थाना नूंह ने बताया कि उसके भाई आलमदीन की मृत्यु हो जाने के बाद उसने अपनी भतीजी सहरूना की वर्ष 2011 में फिरोजपुर झिरका खंड के गांव बघौला निवासी हिदायत पुत्र सफी मोहम्मद के साथ मुस्लिम रीति रिवाज के साथ की थी। शादी के 6 महीने बाद से दहेज के लोभी ससुराल वाले उनसे कभी 50 हजार तो कभी एक लाख और बोलेरो गाड़ी की मांग करते थे। उसने कई बार गांव के मौजिज लोगों की पंचायत ले जाकर आरोपियों को समझाया लेकिन वे उसके बावजूद उसकी भतीजी से मारपीट करते रहे। इसी दौरान सहरूना के दो बच्चे भी पैदा हो गए। आखिरकार दोषियों ने 3 मई 2017 को गांव बघौला में सहरूना की हत्या कर दी थी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि अदालत के फैसले से उन्हें संतुष्टि है कि इंसाफ मिला। इससे दहेज लोभियों को सबक मिलेगा।