घरों से निकलने वाले कूड़े कचड़ों से अब शहर जगमग होगा। दरअसल, नोएडा में घर के कूड़े से बिजली उत्पादन करने की तैयारी है। ऐसा संभव हो गया तो कूड़ों से बिजली बनाने का प्रदेश में यह पहला प्रोजेक्ट होगा।
साल 2014 में कूड़ा मुक्त शहर बनाने के लक्ष्य पर प्राधिकरण ने काम शुरू दिया है। मंगलवार को इस प्रोजेक्ट का प्रस्तुतीकरण हुआ। कंपनी ने अधिकारियों को घर-घर से कूड़ा उठाने से लेकर डंप करने और प्लांट तक पहुंचाने की प्रक्रिया दिखाई, जिससे प्राधिकरण सहमत है।
प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण के समक्ष रैमकी नामक कंपनी ने यह प्रस्तुतीकरण दिया। कंपनी ने बताया कि शहर में छोटे-छोटे ट्रांसफर सेंटर बनाए जाएंगे। छोटे वाहनों के जरिये घरों से कूड़ा उठाकर इस ट्रांसफर सेंटर तक पहुंचाया जाएगा। वहां से बड़े वाहनों पर लादकर कूड़े को प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। वहां उससे बिजली और खाद बनेगी। इस पूरी प्रक्रिया में शहर में कहीं भी कूड़े का ढेर नहीं लगेगा।
इस समय नोएडा में 400 से 500 टन कूड़ा रोजाना निकलता है। इससे तकरीबन 10 मेगावाट बिजली बनाई जा सकती है। इस बिजली को कंपनी खुद बेचेगी। उससे मिलने वाले राजस्व को वह अपने खाते में जमा करेगी। इसके बाद 10 से 15 फीसदी कूड़ा ही बचेगा जिसे डंप करने की जरूरत होगी। यह कूड़ा लैंडफिल साइट पर ले जाया जाएगा। कूड़ा उठाने के शुल्क के रूप में कंपनी को प्रति टन 1500 रुपये का भुगतान प्राधिकरण को करना होगा।
रैमकी ने दिल्ली स्थित नरेला में ये प्लांट लगाया है जो तीन से चार माह चालू हो जाएगा। डीसीईओ अखिलेश सिंह दिल्ली जाकर इस प्लांट का निरीक्षण भी कर चुके हैं। इसके अलावा कंपनी हैदराबाद, चैन्नई व मुंबई में भी इस तरह के प्लांट लगा चुकी है। मंगलवार को प्रस्तुतीकरण देखने के बाद चेयरमैन ने मौखिक रूप से सहमति भी दे दी है।
प्राधिकरण की सलाहकार एजेंसी अर्नेस्ट यंग से इसकी पड़ताल कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। उसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। प्रस्तुतीकरण के दौरान एसीईओ पीके अग्रवाल व डीसीईओ अखिलेश सिंह भी मौजूद रहे।
नोएडा-ग्रेनो का हो सकता है एक प्लांट
नोएडा व ग्रेटर नोएडा दोनों शहरों के लिए एक ही प्लांट लगेगा। दरअसल, सेक्टर-123 में नोएडा प्राधिकरण ने 25 एकड़ लैंड छोड़ी है। वहीं, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 125 एकड़ एरिया तय कर रखी है। इस पर एंवायरमेंट क्लीयरेंस भी मिल चुका है।
बड़े जतन से उठाया जाएगा कूड़ा
घरों से कूड़ा उठाने के बाद सीधे ट्रांसफर सेंटर तक वाहन से ले जाया जाएगा। वहां खड़ी बड़ी गाड़ी में कूड़ा लोडकर उसे सीधे प्लांट तक पहुंचा दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में शहर की सड़कों के किनारे कूड़ा एकत्रित करने की जरूरत नहीं बचेगी। ऐसे में प्राधिकरण ने अब तक जो कूड़ाघर बनाए हैं उनको हटा दिया जाएगा। अंदर के एरिया में बने कूड़ाघर ही बचेंगे।