नोएडावासियों को खारे पेयजल की समस्या से मुक्ति मिलने वाली है। दरअसल यहां जारी गंगाजल परियोजना के दूसरे चरण का काम अंतिम चरण में है। जिसके पूरा हो जाने के बाद मीठा पानी मिलने के उम्मीद है। मालूम हो कि नोएडा में करीब 230 एमएलडी पानी रोजाना सप्लाई की जाती है। इसमें मौजूदा समय में 48 एमएलडी गंगाजल मिक्स किया जाता है, जिससे खारेपन पर बहुत मामूली असर पड़ता है। यह गंगाजल का पहला चरण है।
दूसरे चरण के तहत नोएडा प्राधिकरण 80 क्यूसेक (192 एमएलडी) गंगाजल लाने के लिए प्रयासरत है। इस प्रोजेक्ट का काम अंतिम दौर में है। लाइनों का परीक्षण चल रहा है। अगले कुछ दिनों में गंगाजल मिलने की पूरी संभावना है। इतने गंगाजल से खारापन दूर हो जाएगा। करीब 80 फीसदी गंगाजल मिक्स पानी की सप्लाई नोएडा में होगी।
तीसरे चरण में 90 एमएलडी गंगाजल लाने की भी योजना है। इस पर भी काम शुरू हो चुका है। इतना गंगाजल मिलने से मास्टर प्लान 2021 के अनुसार करीब 21 लाख की आबादी के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। जल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2021 में कुल 570 एमएलडी पानी की जरूरत होगी। हालांकि तीसरे चरण पर काम शुरू करने के साथ ही प्राधिकरण ने मास्टर प्लान 2031 को ध्यान में रखते हुए गंगाजल का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि तीसरे चरण का काम पूरा होने के बाद इस पर भी काम शुरू हो जाएगा।
बोतल बंद पानी से बुझानी पड़ती है प्यास
जल विभाग की ओर से सेक्टरों में सप्लाई किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं है। पानी में मौजूद टीडीएस (घुलनशील ठोस) के चलते सेक्टरवासी चिंतित हैं। इसके अलावा काले पानी और उसमें मौजूद मिट्टी भी परेशानी का सबब बनी हुई है। इससे सेक्टरवासी बोतल बंद पानी पीने को मजबूर हैं। सेक्टरों में सप्लाई हो रहे पानी को लेकर अमर उजाला ने शुक्रवार को लोगों से बात की तो पता चला कि सेक्टर-20 में विभाग की ओर से आपूर्ति किए जाने वाले पानी में टीडीएस 1600 से अधिक है। जबकि पेयजल में 70 से ज्यादा टीडीएस नहीं होना चाहिए।
पानी में टीडीएस 1400 से 1700 तक है। साथ ही, पानी गंदा भी होता है। अब भला इसे कैसे पी सकते हैं। मिट्टी के साथ काला पानी आना शुरू हो जाता है। इससे बोतल बंद पानी से प्यास बुझानी पड़ती है। गंगाजल की आपूर्ति होती है तब पानी ठीक आता है। काफी दिनों से गंगाजल नहीं आया है जिससे बाजार से खरीदकर पानी पीना पड़ता है।
क्या है टीडीएस
पानी में कार्बनिक और अकार्बनिक तत्व होते हैं। तत्वों का कुल ठोस घुलनशील ही टीडीएस है। पानी में अच्छे तत्व (कैल्शियम, जिंक, आयरन आदि) भी होते हैं और शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले भारी तत्व (लेड, पारा, कैडमियम आदि) भी। टीडीएस जितना ज्यादा होगा, उतना ही शरीर को नुकसान होगा। वहीं, अच्छे तत्व भी सामान्य मात्रा में ही होने चाहिए, इनकी अधिकता से भी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा भूमिगत जल में मिट्टी भी होती है जिसका सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक है।