यूपी सीपीएमटी के लिए गाजियाबाद में नोडल अफसर बनाए गए एसडी डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डा. सुशील कुमार की नियुक्ति पर ही सवाल उठने लगे हैं।
प्राचार्य पद से हटने के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर यूपी सीपीएमटी के चीफ कॉर्डिनेटर डा. एके सिंह ने डा. सुशील कुमार को नोडल अफसर बना दिया।
राज्यपाल स्रह्य आदेश पर डा. मंजू गोयल के 28 अप्रैल को प्राचार्य पद संभालने के बावजूद केजीएमयू प्रशासन ने नोडल अफसर बनाने में नियमों का पालन नहीं किया।
इसके साथ ही केजीएमयू प्रशासन की ओर से जिला प्रशासन को 21 जून को भेजी गई नोडल प्रभारी, ऑब्जर्वर और केंद्र प्रभारियों की सूची में नोडल अफसर बनाए गए डा. सुशील कुमार को एसडी कॉलेज का प्रिंसिपल दर्शाया गया।
एसडी कॉलेज की प्राचार्या डा. मंजू गोयल ने बताया कि सीपीएमटी परीक्षा संबंधी केजीएमयू के पत्र आने के बाद मई के दूसरे हफ्ते में ही उन्होंने पत्राचार के जरिए प्राचार्या पद ग्रहण करने की जानकारी दे दी थी।
इसे लेकर चीफ कॉर्डिनेटर डा. एके सिंह से फोन पर भी बात हुई, लेकिन उन्होंने किसी को भी नोडल अफसर बनाने की बात कही।
28 अप्रैल से छुट्टी पर हैं सुशील कुमार
विवाद में आए एसडी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डा. सुशील कुमार 28 अप्रैल से 18 मई तक अवकाश पर रहे। 19 मई को कॉलेज आए और फिर से अवकाश पर चले गए।
तभी से वह अवकाश पर हैं। उनका पक्ष जानने के लिए जब मोबाइल मिलाया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
लखनऊ टू गाजियाबाद तक सभी रहे अनजान
जांच टीम की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि सीपीएमटी का पेपर भले ही लीक न हुआ हो, मगर इन पेपर को लाने में घोर लापरवाही बरती गई थी।
डीएम का भी ऐसा ही मानना है। उनका कहना कि इतनी संवेदनशील परीक्षा के बावजूद केजीएमयू और संबंधित अधिकारियों का रवैया ढुलमुल ही रहा।
डीएम एसवीएस रंगाराव का कहना है कि लखनऊ से एक ट्रक में लादकर पेपर के बाक्स गाजियाबाद तक प्राइवेट कूरियर के हाथ भेज दिए गए। इस दौरान न तो कोई सुरक्षाकर्मी तैनात रहा और न ही वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।
नियमानुसार लखनऊ से गाजियाबाद तक बीच में पड़ने वाले सभी जनपदों के वरिष्ठ अधिकारियों को गोपनीय सूचना दी जानी चाहिए थी, जिससे प्रत्येक जिले में उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते।
ट्रक लखनऊ से चला और सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके गाजियाबाद तक पहुंच गया और अधिकारियों को इसकी खबर तक नहीं दी गई।