जिले के सबसे बड़े सिविल अस्पताल में मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए शौचालय ही नहीं है। मरीज और तीमारदारों के लिए जो शौचालय बनाए गए हैं उनकी हालत भी ठीक नहीं है।
दो सौ बेड वाले सिविल अस्पताल में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए करीब सवा सौ लोगों का स्टाफ तैनात है। इनमें 13 लेडी डॉक्टर सहित 32 डॉक्टर हैं।
23 नर्स के अलावा करीब 50 महिला-पुरुषों का पैरामेडिकल स्टाफ है। बाकी कर्मचारी अन्य कार्यों में लगे हैं। ओपीडी में डॉक्टरों के चैंबर बनाए गए हैं इसी तरह सभी वार्डों में भी डॉक्टर के लिए चैंबर हैं लेकिन इनमें से किसी में भी शौचालय की सुविधा नहीं है।
हां तीसरे तल पर प्रशासनिक ब्लॉक में एक शौचालय बनाया गया है, लेकिन इसका इस्तेमाल पीएमओ और उनके कार्यालय में काम करने वाला स्टाफ ही करता है।
भूतल, प्रथम और द्वितीय तल पर न तो डॉक्टरों के लिए और न ही नर्सों के लिए शौचालय की सुविधा है। उधर, अस्पताल में मरीज और उनके तीमारदारों के लिए शौचालय बनाए गए हैं लेकिन इनमें न तो सफाई रहती है और न ही सुरक्षा।
द्वितीय तल स्थित सर्जरी वार्ड के शौचालयों में दरवाजे टूटे हुए हैं। यूरिनल भी गंदा पड़ा रहता है। प्रथम तल पर जच्चा बच्चा वार्ड के शौचालय का भी हाल बुरा है।