त्योहारों को लेकर पूर्वांचल की तरफ जाने वाली प्रमुख ट्रेनें अभी से फुल हो गई है। दशहरा और दीपावली जिस दिन है उसके एक सप्ताह पहले तक टिकट उपलब्ध नहीं है।
60 दिन पहले जैसे ही टिकट की बुकिंग शुरू होती है, 5-7 मिनट के भीतर सभी ट्रेन फुल हो जाती है। ऑनलाइन टिकट बुक कराना तो बेहद कठिन है।
रोजाना जाम में फंसने वालों के लिए अच्छी खबर
23 नवंबर को दीपावली है और 29-30 नवंबर को छठ महोत्सव, लेकिन अगर आप इन दोनों तारीखों के एक सप्ताह पहले पूर्वांचल की तरफ जाने वाली ट्रेन में टिकट चाह रहे हैं तो वेटिंग टिकट के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।
3 अक्तूबर को दशहरा है, लिहाजा बंगाल की तरफ जाने वाली ज्यादातर ट्रेन फुल है। स्लीपर क्लास के साथ वातानुकूलित कोच में भी जगह नहीं है।
रेलवे स्टेशनों की टिकट खिड़की की बात करें तो आधी रात से त्योहारों में घर जाने वाले लाइन में लग जा रहे हैं। सुबह आठ बजे जब टिकट काउंटर पर टिकट मिलना शुरू हाता है तो अधिकांश को मायूस होकर घर लौटना पड़ रहा है।
स्पेशल ट्रेन या तत्काल टिकट पर भरोसा
दशहरा या दिवाली में अगर आप घर जाने की सोच रहे हैं तो आपको स्पेशल ट्रेन की घोषणा का इंतजार करना होगा। क्योंकि पूर्वांचल की तरफ जाने वाली न तो सप्तक्रांति ट्रेन में टिकट मिल रहा है और न ही वैशाली, शहीद, सत्याग्रह, राजधानी, पूर्वा, संपूर्ण क्रांति, श्रमजीवी, मगध, गरीबरथ, गोरखधाम, जनसंपर्क या कोई और ट्रेन में ही। ऐसे में अब तत्काल टिकट ही विकल्प बचा है।
कोटे के भरोसे हैं कुछ लोग
टिकट काउंटर से लौटने वाले कई लोग सांसद या अन्य कोटे के भी भरोसे हैं। लिहाजा अभी से ही अपने-अपने क्षेत्र के सांसदों के घर का भी चक्कर काटने लगे हैं। बता दें कि आरक्षित श्रेणी की कोच में सांसदों का भी कोटा है। लेटर पैड पर टिकट का ब्यौरा लिखकर मंत्रालय में भेजने से कई वेटिंग टिकट कंफर्म भी हो जाता है।
जम्मू जाने वाली ट्रेन में भी टिकट नहीं
नवरात्र के दौरान जम्मू की तरफ जाने वाली ट्रेन भी खचाखच भरी हुई है। ऐसे में वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाना भी मुश्किल है। श्रीशक्ति, झेलम, जम्मू मेल, शालीमार एक्सप्रेस, उत्तर संपर्क क्रांति ट्रेन अभी से ही फुल हो चुकी है।