राज्य सरकार बेशक भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने का दावा करे पर हकीकत ठीक उलट है। मुख्यमंत्री के लिखित आदेश के बाद भी शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा नगर निगम के दो कर्मचारियों धनराज सिंह व रतन लाल रोहिल्ला को पदोन्नति न देना इसका ताजा उदाहरण है।
विभाग ने इस मामले को पिछले 11 महीने लटकाया हुआ है। न तो उनके आवेदन को निरस्त किया जा रहा है और न ही पदोन्नति दी जा रही है। म्युनिस्पिल कॉरपोरेशन इंप्लाइज फेडरेशन ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. राकेश गुप्ता, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव और निदेशक को एक शिकायत भेजकर उच्चस्तरीय जांच करवाने की मांग की है।
यूनियन ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि सरकारी सेवा में ईमानदारी से काम करने वाले और भ्रष्ट तत्वों के विरोध में आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को निकाय विभाग के भ्रष्ट सिस्टम द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। यूनियन का यह भी कहना है कि इस मामले को लेकर लोकायुक्त से भी शिकायत करेंगे, जिससे दोषी लोगों को दंडित करवाया जा सके।
यूनियन के महासचिव रमेश कुमार जागलान और प्रधान महेंद्र कुमार ने बताया कि निगम ने अपने दो कर्मचारियों को पदोन्नति देने का प्रस्ताव शहरी निकाय निदेशालय को 17 दिसंबर 2015 को भेजा था।
निदेशालय कर्मियों ने 10 महीने से अधिक समय तक मामले को लटकाए रखा। यूनियन का आरोप है कि निदेशालय के अधिकारी और कर्मचारी पदोन्नति के नाम पर अपनी जेब गरम करना चाहते हैं। यूनियन ने मुख्यमंत्री, प्रधान सचिव और शहरी स्थानीय निकाय विभाग को पत्र लिखकर इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।