हरियाणा के बड़े औद्योगिक हब आईएमटी मानेसर का नाम देश के बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां पर देश की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां मारुति-सुजुकी और होंडा मौजूद हैं।
इसके बाद भी यहां आग लगने जैसी घटना के दौरान सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं। यहां सबसे बड़ी कमी फायर स्टेशन की है। आग लगने की स्थिति में यहां के उद्योगों को गुड़गांव के फायर स्टेशन पर निर्भर रहना पड़ता है।
इसी कारण कहा जाता है कि गुड़गांव की तकरीबन तीन हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक यूनिटें बारूद के ढेर पर सवार हैं। आईएमटी मानेसर के उद्यमी पिछले कई वर्षों से फायर स्टेशन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, मगर अभी तक उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका है। अब आईएमटी मानसेर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन इस मुद्दे को लेकर हरियाणा के नए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के दरबार में जाने की तैयारी कर चुका है।
मानेसर के उद्यमियों की शिकायत है कि यहां फायर स्टेशन नहीं होने से काफी परेशानी होती है। आग लगने की घटनाएं यहां होती रहती हैं। विषम परिस्थिति में गुड़गांव से मानेसर आने में दमकल गाड़ियों को काफी परेशानी होती है, क्योंकि रास्ते में दिनभर जाम रहता है। एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन के मुताबिक, मानेसर की औद्योगिक यूनिटें हमेशा खतरे में रहती हैं।
हमेशा होती रही टाल-मटोल
आईएमटी-मानेसर में फायर स्टेशन का मामला हमेशा टाल-मटोल वाला रहा। पहले कहा जा रहा था कि नगर निगम यहां फायर स्टेशन बनाएगा, मगर निगम ने यह कहकर हाथ खींच लिए कि यह क्षेत्र उसके अधिकार में नहीं आता। वहीं एचएसआईआईडीसी ने फायर विभाग के पाले में गेंद डाल दी। मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पहुंचा, तब एचएसआईआईडीसी ने फायर स्टेशन बनाने के लिए प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा था।
सेक्टर-8 में बनना है स्टेशन
आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी ने बताया कि यह फायर स्टेशन आईएमटी-मानेसर के सेक्टर-8 में बनेगा। इसके निर्माण का खर्च और जमीन दोनों एचएसआईआईडीसी वहन करेगी। इसके लिए दो एकड़ की साइट एचएसआईआईडीसी ने अलॉट कर दी है। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार ने फायर स्टेशन को मंजूरी दे दी है, मगर इसकी फाइल अभी भी लटकी हुई है।