सरकारी बसों से लेकर निजी ऑटो और ईको गाड़ियों में भी सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल
हेमंत शर्मा
पलवल। जिले में यात्रियों की सुविधा के लिए चल रही सरकारी बसों से लेकर निजी डग्गामार बसों, ऑटो और ईको गाड़ियों में प्रतिदिन हजारों लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए सफर करते हैं। ऐसे में सार्वजनिक वाहनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए अग्निशमन यंत्र होना जरूरी है, ताकि किसी आपात स्थिति में आग लगने पर समय रहते उस पर काबू पाया जा सके और यात्रियों की जान बचाई जा सके। इसके बावजूद जिले में चल रहे अधिकांश सार्वजनिक वाहनों में अग्निशमन यंत्र नहीं होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में किसी वाहन में आग लगने की घटना होने पर बड़ा हादसा हो सकता है। जिले की सड़कों पर बड़ी संख्या में सरकारी बसों के साथ निजी बसें, ऑटो और ईको गाड़ियां चल रही हैं। इन वाहनों में रोजाना विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, महिलाएं और अन्य यात्री सफर करते हैं। यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले इन वाहनों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होना बेहद जरूरी है। लेकिन अग्निशमन यंत्रों की कमी के कारण आपात स्थिति में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आग लगने की स्थिति में शुरुआती समय में उसे बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र मददगार साबित हो सकता है। इसके अभाव में आग तेजी से फैलने और यात्रियों के लिए बाहर निकलने में मुश्किल होने का खतरा बना रहता है।
हाल ही में ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर डबल डेकर स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत होने की घटना ने यात्री वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद सार्वजनिक वाहनों में अग्निशमन यंत्रों और अन्य सुरक्षा इंतजामों की जरूरत पर चर्चा तेज हो गई है। जिले में भी यात्री वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच और उनमें जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
सरकारी बसों में भी अग्निशमन यंत्रों की कमी
पड़ताल के दौरान जिले में चल रही अधिकांश सरकारी बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं पाए गए। यदि किसी बस में अचानक आग लग जाए तो यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने और आग पर काबू पाने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में बसों की सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
निजी बसों, ऑटो और ईको गाड़ियों में भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही निजी डग्गामार बसों, ऑटो और ईको गाड़ियों में भी बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। इन वाहनों में कई बार निर्धारित सीटों से अधिक यात्रियों को बैठा लिया जाता है। ऐसे में आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इन वाहनों में भी अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आग लगने जैसी घटना होने पर अग्निशमन यंत्र नहीं होने से यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में निजी यात्री वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
बसों में फर्स्ट एड किट के डिब्बे, अंदर दवाइयों की जगह अन्य सामान
पड़ताल के दौरान कई बसों में फर्स्ट एड किट के डिब्बे तो मिले, लेकिन उनमें जरूरी दवाइयां नहीं थीं। कुछ बसों में इन डिब्बों में नंबर प्लेट, टेप और अन्य सामान रखा मिला। ऐसे में दुर्घटना या किसी यात्री के घायल होने पर प्राथमिक उपचार की सुविधा प्रभावित हो सकती है।
विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में फर्स्ट एड किट और अग्निशमन यंत्र उपलब्ध हैं। जिन बसों में ये सुरक्षा सुविधाएं नहीं हैं, उनकी जांच कराई जाएगी और उनमें आवश्यकतानुसार फर्स्ट एड किट व अग्निशमन यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। - जितेंद्र सिंह,जीएम रोडवेज पलवल
यात्री वाहनों की समय-समय पर जांच की जाती है। सुरक्षित वाहन पॉलिसी के तहत स्कूल बसों में भी सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता की जांच की जाती है। जांच के दौरान कमी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।- जितेंद्र, आरटीए अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी